मूल निवासियों के अधिकारों को लेकर ओबीसी महासभा का प्रदर्शन, राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
कटनी जिला मध्य प्रदेश

मूल निवासियों के अधिकारों को लेकर ओबीसी महासभा का प्रदर्शन, राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
(पढिए जिला कटनी ब्यूरो चीफ ज्योति तिवारी की खास खबर)
मध्य प्रदेश जिला कटनी में
मूल निवासियों और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा तथा मनुवादी ताकतों द्वारा फैलाए जा रहे कथित आतंकवाद के विरोध में आज ओबीसी महासभा के बैनर तले जिला मुख्यालय कलेक्ट्रेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया गया।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष डॉ. ए.के. खान के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने नारेबाजी करते हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मूल निवासियों के खिलाफ लगातार हो रहे उत्पीड़न, जमीनों पर अवैध कब्जे, और मंदिर भूमि विवादों में प्रशासन की निष्क्रियता पर त्वरित कार्रवाई की जाए। प्रदर्शन में यह भी आरोप लगाया गया कि समाजसेवी बी.के. पटेल के घर पर बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के जेसीबी चलाकर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई, जबकि वे वर्षों से वहां निवासरत थे। ओबीसी महासभा ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों पर कार्रवाई और बी.के. पटेल को न्याय दिलाने की मांग की।
डॉ. ए.के. खान ने ज्ञापन में कहा कि जब संविधान और कानून यह स्पष्ट करता है कि वर्ष 2005 से पहले से काबिज आदिवासियों व मूल निवासियों को उजाड़ा नहीं जाएगा, तो फिर सरकार अपने ही कानून का उल्लंघन क्यों कर रही है? उन्होंने पड़ुआ ग्राम पंचायत में मंदिर भूमि पर अवैध कब्जों और कथित अनैतिक गतिविधियों पर शीघ्र सुनवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान यह भी खुलासा किया गया कि पड़ुआ निवासी बुजुर्ग महेश यादव ने प्रशासन की निष्क्रियता से क्षुब्ध होकर मुख्यमंत्री निवास के समक्ष आत्मदाह की चेतावनी दी है।
ज्ञापन में मांग की गई कि मंदिर भूमि से अवैध कब्जा तत्काल हटाया जाए, बी.के. पटेल पर की गई कार्यवाही को रद्द किया जाए और रीठी व ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में आदिवासियों को उनके पारंपरिक निवास स्थल का कानूनी अधिकार दिया जाए।
महासभा ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे शांतिपूर्ण आंदोलनों को और व्यापक रूप देंगे। आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अमन-पसंद नागरिक हैं और किसी भी तरह के टकराव से बचना चाहते हैं, लेकिन न्याय की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।




