वर्षों से बसे गरीबों पर कार्रवाई क्यों? — सुखमंती सिंह ने उठाए सवाल, पुराने मकानों को पट्टा देने की मांग
जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

वर्षों से बसे गरीबों पर कार्रवाई क्यों? — सुखमंती सिंह ने उठाए सवाल, पुराने मकानों को पट्टा देने की मांग
(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)
जनकपुर (एमसीबी) क्षेत्र में वन भूमि एवं राजस्व भूमि पर वर्षों से निवास कर रहे गरीब परिवारों के मकानों को तोड़े जाने की कार्रवाई को लेकर जनप्रतिनिधियों ने कड़ी आपत्ति जताई है। जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति श्रीमती **सुखमंती सिंह** ने मौके पर पहुंचकर वन विभाग की कार्रवाई को रुकवाया और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
बताया जा रहा है कि लगभग 15 से 20 वर्षों से बसे कई परिवारों के मकानों को वन विभाग द्वारा हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। सूचना मिलते ही श्रीमती सुखमंती सिंह मौके पर पहुंचीं और तत्काल कार्रवाई पर रोक लगवाई। उन्होंने वन विभाग के एसडीओ को स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत और पूंजी लगाकर अपने घर बनाए हैं, उन्हें इस तरह बेघर करना न्यायोचित नहीं है।

सुखमंती सिंह ने कहा कि जब प्रारंभ में अतिक्रमण हो रहा था, उस समय विभाग मौन क्यों रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से अतिक्रमण पनपता है, और जब गरीब व्यक्ति अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर मकान तैयार कर लेता है, तब उस पर कार्रवाई की जाती है। यह न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कार्रवाई करनी है तो सभी पर समान रूप से होनी चाहिए। जनकपुर क्षेत्र में ही कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां वन भूमि एवं राजस्व भूमि पर कुछ प्रभावशाली लोगों और यहां तक कि विभागीय कर्मचारियों के मकान भी बने हुए हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। ऐसे में केवल गरीबों को निशाना बनाना उचित नहीं है।

श्रीमती सिंह ने मांग की कि जिन परिवारों का वर्षों से कब्जा है और जिन्होंने स्थायी रूप से अपने घर बना लिए हैं, उन्हें शासन द्वारा पट्टा प्रदान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं गरीबों को भूमि का अधिकार देने की बात करती है, ऐसे में इस प्रकार की कार्रवाई सरकार की नीतियों के विपरीत है।
उन्होंने आगे कहा कि एक ओर सरकार गरीबों के हितैषी होने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से बसे लोगों को उजाड़ने की कार्रवाई हो रही है, जिससे आम जनता में आक्रोश व्याप्त है। यह दोहरी नीति जनता के साथ अन्याय है।
अंत में उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पुराने कब्जों पर की जा रही कार्रवाई को तत्काल रोका जाए और पात्र परिवारों को नियमानुसार पट्टा प्रदान कर उन्हें स्थायी राहत दी जाए, ताकि गरीबों को बार-बार इस प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।




