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जिला एमसीबी के कई ग्राम पंचायतों में अनियमितता के आरोप

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

जिला एमसीबी के कई ग्राम पंचायतों में अनियमितता के आरोप

कार्यालय बंद रहने से ग्रामीण परेशान, 15वें वित्त की राशि के दुरुपयोग की जांच की मांग

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

कुंवारपुर (भरतपुर विकासखंड), 27 फरवरी।
छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिला अंतर्गत भरतपुर विकासखंड की उप तहसील कुंवारपुर क्षेत्र में कई ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत कार्यालय नियमित रूप से बंद रहते हैं और सचिव, रोजगार सहायक तथा ऑपरेटर मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं, जिससे आम जनता के जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार पंचायतों में सचिव, रोजगार सहायक, ऑपरेटर और सरपंच जैसे पदों पर कर्मचारी तैनात होने के बावजूद अधिकांश समय कार्यालय बंद मिलता है। बताया जा रहा है कि कुछ सचिव जनकपुर में निवास करते हैं और वहीं से पंचायत का कामकाज संचालित कर रहे हैं। जब ग्रामीण किसी शासकीय कार्य या प्रमाण पत्र के लिए पंचायत पहुंचते हैं तो उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।

पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि कई सचिवों को एक से अधिक पंचायतों का प्रभार दिया गया है, जिसके कारण वे नियमित रूप से मुख्यालय में उपस्थित नहीं हो पाते। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि इस व्यवस्था का फायदा उठाकर पंचायतों में पारदर्शिता की कमी हो रही है और योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता बढ़ रही है।

15वें वित्त आयोग की राशि पर सवाल

ग्रामीणों ने 15वें वित्त आयोग (2024–26) की राशि के उपयोग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता की कमी है तथा कई कार्यों का भौतिक सत्यापन आवश्यक है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित पंचायतों में हुए कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि शासकीय राशि के दुरुपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सके और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

कई पंचायतों की स्थिति समान

कुंवारपुर उप तहसील अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों — कुंवारपुर, कोयलारा, गोधौरा, तिलौली, फूलझार और गढ़वार — में भी इसी प्रकार की स्थिति होने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि आमजन के कार्यों के लिए उन्हें जनकपुर के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है।

कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

ग्रामवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि पंचायतों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, वित्तीय कार्यों का ऑडिट कराया जाए तथा जिम्मेदार कर्मचारियों पर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतें ग्रामीण विकास की मूल इकाई हैं और यदि वहीं पारदर्शिता एवं जवाबदेही नहीं होगी, तो शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना कठिन हो जाएगा।

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