Breaking Newsअन्य राज्यआगराइंदौरइलाहाबादउज्जैनउत्तराखण्डगोरखपुरग्राम पंचायत बाबूपुरग्वालियरछत्तीसगढ़जबलपुरजम्मू कश्मीरझारखण्डझाँसीदेशनई दिल्लीपंजाबफिरोजाबादफैजाबादबिहारभोपालमथुरामध्यप्रदेशमहाराष्ट्रमेरठमैनपुरीयुवाराजस्थानराज्यरामपुररीवालखनऊविदिशासतनासागरहरियाणाहिमाचल प्रदेशहोम

जनकपुर में वन विभाग की कार्रवाई पर बवाल — गरीबों के घर पर चला बुलडोजर, परिवारों में मचा हाहाकार

जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

जनकपुर में वन विभाग की कार्रवाई पर बवाल — गरीबों के घर पर चला बुलडोजर, परिवारों में मचा हाहाकार

(पढ़िए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास रिपोर्ट)

जनकपुर (एमसीबी)। छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के उप वन मंडल जनकपुर में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इस कार्रवाई में गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया, जिससे कई परिवार बेघर हो गए और प्रभावित लोग बिलख-बिलख कर रोते नजर आए।

जानकारी के अनुसार, जनकपुर क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर लगभग 150 से 200 लोगों द्वारा अतिक्रमण** किया गया है। इनमें कुछ शासकीय कर्मचारी, सेवानिवृत्त अधिकारी और स्थानीय नेताओं के शामिल होने की भी बात सामने आ रही है। बावजूद इसके, स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों, विशेषकर गरीब और मजदूर वर्ग पर ही केंद्रित की गई।

एक मकान को बनाया गया निशाना, उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग ने निष्पक्षता नहीं बरती और एक परिवार को टारगेट कर मकान गिरा दिया गया। इससे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के कब्जों को नजरअंदाज कर कमजोर वर्ग पर कार्रवाई की जा रही है।

“प्रशासनिक आतंकवाद” का आरोप, राजनीति गरमाई

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर “प्रशासनिक आतंकवाद” जैसे आरोप भी सामने आए हैं। मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बयान देते हुए कहा कि वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले अधिकांश लोग बाहरी हैं और उन्हें किसी का संरक्षण प्राप्त है।

वहीं, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने इस बयान पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों की मिलीभगत से ही गरीब परिवारों के घर गिराए जा रहे हैं, जबकि बड़े और प्रभावशाली लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

समान कार्रवाई की मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने मांग की है कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार सभी अतिक्रमणकारियों पर समान रूप से कार्रवाई की जाए। केवल गरीब मजदूरों के घरों पर बुलडोजर चलाना अन्यायपूर्ण है। उनका कहना है कि कई परिवार पिछले 15-20 वर्षों से यहां रह रहे हैं, ऐसे में उन्हें अचानक उजाड़ना अमानवीय है।

विभागीय मिलीभगत के आरोप

मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वन विभाग के कुछ कर्मचारी और अधिकारी स्वयं भी वन भूमि पर कब्जा किए हुए हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। साथ ही जंगलों में अवैध कटाई और कब्जों पर भी विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर आरोप लग चुके हैं, लेकिन उच्च स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार संदेह बना हुआ है।

जनता की मांग — निष्पक्ष जांच और न्याय

क्षेत्र की जनता ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही वर्षों से बसे गरीब परिवारों को राहत देते हुए उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था या पट्टा प्रदान किया जाए।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस विवादास्पद मामले में क्या कदम उठाता है और क्या सभी वर्गों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

Related Articles

Back to top button