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सरकार के खिलाफ आम आदमी पार्टी का मोर्चा हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज हुए बेहाल

जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

सरकार के खिलाफ आम आदमी पार्टी का मोर्चा हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज हुए बेहाल

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

एनएचएम कर्मचारियों की नियमितीकरण मांग पर सरकार के खिलाफ आम आदमी पार्टी का मोर्चा

रायपुर।
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा संकट मंडरा रहा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों की हड़ताल से अस्पतालों में उपचार कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं और मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन सेवाओं पर भी इसका असर दिखाई देने से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

एनएचएम कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सेवाएं स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अनिवार्य हैं,

इसके बावजूद सरकार उनकी सबसे अहम मांगनियमितीकरण को टाल रही है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ सरकार उनकी समस्याओं को सुलझाने की बजाय उन्हें सेवा से पृथक कर रही है।

यह रवैया प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि सरकार यह कहकर गुमराह कर रही है कि नियमितीकरण का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, जबकि वास्तविकता यह है कि राज्य सरकार ही इस दिशा में निर्णय ले सकती है।

यदि सरकार के पास यह अधिकार नहीं है, तो भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कर्मचारियों के नियमितीकरण का वादा करके जनता और कर्मचारियों के साथ छल किया है।

आम आदमी पार्टी ने दिया समर्थन
आम आदमी पार्टी (AAP) ने खुलकर एनएचएम कर्मचारियों के समर्थन में उतरते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है।

आप नेताओं का कहना है कि सरकार ने जिन 25 कर्मचारियों को बर्खास्त किया है, उन्हें तत्काल बहाल किया जाए और “कार्य नहीं, वेतन नहीं” की नीति की बजाय हड़ताल अवधि का वेतन भी दिया जाए।

आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार कर्मचारियों की जायज़ मांगों को जल्द पूरा नहीं करती, तो पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगी।

इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री के निवास का घेराव कर सरकार को कठघरे में खड़ा किया जाएगा।

जनता परेशान, सरकार पर सवाल
हड़ताल के चलते जहां ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी अस्पतालों तक मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर कब तक राज्य सरकार स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सेवा की उपेक्षा करती रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था पहले ही लचर है

ऐसे में कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान बेहद आवश्यक है

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