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जिले में दिव्य कला मेला दिव्यांगजनों द्वारा निर्मित सामग्री बनी आकर्षण का केंद्र स्थानीयों ने सजाई अपनी कलाकृतियों का स्टॉल

जिला जबलपुर मध्य प्रदेश

जिले में दिव्य कला मेला
दिव्यांगजनों द्वारा निर्मित सामग्री बनी आकर्षण का केंद्र स्थानीयों ने सजाई अपनी कलाकृतियों का स्टॉल

(पढिए राजधानी एक्सप्रेस न्यूज़ हलचल आज की सच्ची खबरें)

मध्य प्रदेश जिला जबलपुर में केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा एमएलबी स्कूल के खेल मैदान में आयोजित किया जा रहा 21 वाँ दिव्यकला मेला दिव्यांगजनों के हौसलों में पंख लगाकर उन्हें एक नई उड़ान भरने के लिए तैयार कर रहा है।

यह मेला दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का एक सशक्त माध्यम तो है ही, साथ ही उनके भीतर निहित बहुमुखी कलाओं को उजागर करने का मंच भी है।

देश के विभिन्न राज्यों के दिव्यांग उद्यमियों के साथ-साथ दिव्यकला मेले में जस्टिस तंखा मेमोरियल रोटरी इंस्टीट्यूट फॉर स्पेशल चिल्ड्रन में अध्ययनरत दिव्यांग बच्चों द्वारा भी स्टॉल लगाया गया है।

जहां इंस्टीट्यूट के मंदबुद्धि बच्चों द्वारा तैयार किए गए दिये

तोरण, डोरमेट एवं पर्स आदि उत्पादों को रिवायती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

स्टॉल पर मौजूद संस्थान की शिक्षिका दिव्यानी तिवारी ने बताया कि सबसे पहले विभिन्न आकृतियों के दियों में सुंदर-सुंदर आकृतियों का निर्माण कर उन्हें बेचने के योग्य बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि संस्थान के बच्चों द्वारा पुराने कपड़ों का उपयोग कर डोरमेट पर्स एवं कंपॉक्स बैग का निर्माण भी किया जाता है।

मेले में कम से कम दामों पर बच्चों द्वारा निर्मित इन सामग्रियों का विक्रय किया जा रहा है।

दिव्यकला मेले में शासकीय मानसिक रूप से अविकसित बालगृह एवं शासकीय श्रवण बाधितार्थ विद्यालय के छः से पंद्रह वर्ष की आयु के बच्चों द्वारा संयुक्त रूप से लगाए गए

स्टॉल में मोतियों की माला एवं तोरण, दिये, स्वनिर्मित चित्रों एवं अन्य सजावटी सामग्रियों को प्रदर्शन एवं विक्रय के लिए रखा गया है।

संस्थान की शिक्षिका अरुणिमा चतुर्वेदी ने बताया कि बच्चों द्वारा जैल वैक्स को पिघलाकर कांच के आकर्षक ग्लासों में डालकर रेडीमेड दीपकों का निर्माण किया जा रहा है।

यह दिये परंपरागत दियों की अपेक्षा अधिक समय तक जलते हैं और घरों में आकर्षण का केंद्र बनते हैं। मेले में यह दिए मात्र 100 रूपए में उपलब्ध है।

स्टॉल में श्रवण बाधितार्थ विद्यालय के छात्र हेमंत कुमार की चित्रों को भी प्रदर्शन और विक्रय के लिए रखा गया गया है।

हेमंत द्वारा मात्र एक दिन की अवधि में सिर्फ 300 रुपए में लोगों की तस्वीर तैयार की जा रही हैं।

दिव्यांगजनों के उत्पादों एवं शिल्प कौशल के प्रदर्शन के लिये 17 से 27 अक्टूबर तक आयोजित किये जा रहे हैं

राष्ट्रीय स्तर के दिव्य कला मेला में दिव्यांगजनों द्वारा रोज शाम आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी की जा रही है।

इसी क्रम में मेले के छठवें दिन आज मंगलवार की शाम दृष्टि दिव्यांग छात्र-छात्राओं द्वारा ब्रेल लिपि से सुंदरकांड का सस्वर पाठ किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संध्या में आज मुख्य आकर्षण का केंद्र था।

श्री रामचरित मानस के सुंदरकांड के पाठ में राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ, स्पर्श ज्ञानदीप छात्रावास की छात्राओं एवं शासकीय दृष्टि बाधितार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के दृष्टि बाधित छात्रों ने हिस्सा लिया।

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