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मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में तेंदूपत्ता ‘साख कार्टन’ प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में तेंदूपत्ता ‘साख कार्टन’ प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन 2026 की तैयारियां तेज, गुणवत्ता सुधार और नए नियमों पर दिया गया जोर

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

छत्तीसगढ़ प्रदेश के एमसीबी जिले अंतर्गत मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन 2026 को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में वन विभाग द्वारा ‘तेंदूपत्ता साख कार्टन’ विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, फड़ मुंशी, प्रबंधकों एवं संग्रहण से जुड़े हितग्राहियों को तेंदूपत्ता की गुणवत्ता, कटाई की वैज्ञानिक विधि और नवीन नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वन मंडलाधिकारी मनेन्द्रगढ़ उपस्थित रहे। उनके साथ उप वन मंडलाधिकारी (एसडीओ) भरतपुर, केलारी एसडीओ, वनपाल, डिप्टी रेंजर, कर्मचारी संघ अध्यक्ष, प्रबंधक तथा फड़ मुंशी सहित बड़ी संख्या में विभागीय अमला मौजूद रहा।

15 फरवरी से 15 मार्च तक होगी बूटा कटाई

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि तेंदूपत्ता की उत्कृष्ट गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बूटा कटाई का कार्य 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच किया जाना चाहिए। इस अवधि में की गई वैज्ञानिक कटाई से लगभग 40 से 50 दिनों के भीतर उच्च गुणवत्ता वाली पत्तियां तैयार होती हैं। ऐसी पत्तियों की बाजार में बेहतर मांग रहती है और उन्हें उचित दर पर खरीदा जाता है।

अधिकारियों ने समझाया कि सही समय पर कटाई, पौधों की सुरक्षा और संतुलित प्रबंधन से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि वन संरक्षण को भी मजबूती मिलती है।

‘हरा सोना’ है तेंदूपत्ता

तेंदूपत्ता को क्षेत्र में ‘हरा सोना’ कहा जाता है क्योंकि यह हजारों ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। वर्तमान में प्रति मानक बोरा तेंदूपत्ता की खरीदी दर लगभग 5500 रुपये निर्धारित की गई है। संग्रहकर्ता किसान अपनी पत्तियां निर्धारित खरीदी केंद्रों में लाकर बेचते हैं, जहां से ठेकेदारों के माध्यम से क्रय किया जाता है।

प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि उच्च गुणवत्ता की पत्तियां ही बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करती हैं, इसलिए संग्रहकर्ताओं को पत्तियों की साफ-सफाई, सही बंडलिंग और सुरक्षित भंडारण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

इस वर्ष लागू होंगे कुछ नए नियम

वन विभाग द्वारा इस बार संग्रहण और खरीदी प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

* शाम के समय संग्रहित तेंदूपत्ता की खरीदी अगले दिन सुबह की जाएगी।
* प्रत्येक संग्रहकर्ता को निर्धारित कार्ड के आधार पर ही खरीदी की जाएगी।
* प्रति व्यक्ति कार्य और नियमों के अनुरूप ही पत्तियों की मात्रा स्वीकार की जाएगी।
* पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित हितग्राहियों और स्थानीय समितियों की होगी।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

आजीविका और वन संरक्षण दोनों पर जोर

कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि वन संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है। यदि वैज्ञानिक तरीके से कटाई की जाए तो वन संपदा सुरक्षित रहती है और आने वाले वर्षों में भी बेहतर उत्पादन मिलता है।

वन मंडलाधिकारी ने सभी संग्रहकर्ताओं से अपील की कि वे विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन करें और अवैध कटाई या अनुचित भंडारण से बचें। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य ग्रामीणों को अधिकतम लाभ पहुंचाना और वन संपदा का संरक्षण करना है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित हितग्राहियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए आगामी सीजन में गुणवत्ता सुधार और नियमों के पालन का संकल्प लिया।

तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन 2026 को लेकर जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं और वन विभाग इसे व्यवस्थित, पारदर्शी और लाभकारी बनाने के लिए सतत प्रयासरत है।

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