Breaking Newsअन्य राज्यआगराइंदौरइलाहाबादउज्जैनउत्तराखण्डगोरखपुरग्राम पंचायत बाबूपुरग्वालियरछत्तीसगढ़जबलपुरजम्मू कश्मीरझारखण्डझाँसीदेशनई दिल्लीपंजाबफिरोजाबादफैजाबादबिहारभोपालमथुरामध्यप्रदेशमहाराष्ट्रमेरठमैनपुरीयुवाराजस्थानराज्यरामपुररीवालखनऊविदिशासतनासागरहरियाणाहिमाचल प्रदेशहोम

हटा में आक्रोशित दलित-आदिवासियों ने (एकता परिषद अन्याय के खिलाफ एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

तहसील हटा जिला दमोह मध्य प्रदेश

हटा में आक्रोशित दलित-आदिवासियों ने (एकता परिषद अन्याय के खिलाफ एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

(पढिए जिला दमोह ब्यूरो चीफ गजेंद्र साहू के साथ हटा से संवाददाता-पुष्पेन्द्र पाण्डे )

आक्रोशित दलित-आदिवासियों ने एसडीएम हटा को ज्ञापन सौपा

(एकता परिषद अन्याय के विरुद्ध शीघ्र बडा़ आन्दोलन करेगा)

मध्य प्रदेश जिला दमोह तहसील हटा ब्लॉक के अंतर्गत घोघरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम धूरखेड़ा (भूलखेड़ा) के अनेक भूमिहीन, मजबूर, वंचित,दलित-आदिवासियों ने केन बेतवा लिंक परियोजना के नाम से उनकी वर्षों से काबिज कृषि भूमि छीने जाने पर भारी आक्रोश व्यक्त करते हुये हटा पहुँच कर एसडीएम राकेश कुमार मरकाम को अपना हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन सौपा। ज्ञातव्य हो कि इस मुद्दे पर ग्राम पंचायत घोघरा, बछामा, चौरईया, अमझिर के दलित-आदिवासियो एवं पीडि़तों के द्वारा भी विगत 14 मार्च 2024 को हटा पहुँच कर तहसीदार प्रवीण त्रिपाठी के समक्ष उनके व्दारा जारी नोटिस के जबाब मे सामुहिक आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है।

इस बारे मे एकता परिषद के पूर्व राज्य समन्वयक सुजात खान, धूरखेड़ा निवासी एवं म. प्र.एकता परिषद के मुखिया सुन्दर सिंह आदिवासी, कल्याण गौड़, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि बारे लाल अहिरवार, रामदयाल अहिरवार, धनीराम गौड़, हलकाईं सिंह आदिवासी ,बिन्दा सिंह गौड़, देवकी गौड़,नन्हें भाई गौड़, पूरन गौड़ ने बताया कि गाँव के लगभग 60-70 गरीब,दलित- आदिवासी

किसान राज्य शासन की भूमि के खसरा नं. 227 के रकवा 80.00 हे.भूमि पर अपने बाप- दादा के जमाने से पुश्तैनी-कब्जा कर उस पर कृषि कार्य करते चले आ रहे हैं।

यह काबिज भूमि ही हम सबके सम्मान पूर्वक जीवन यापन का एक मात्र जरिया है।

उक्त काबिज भूमि के नोटिस, जुर्माना रसीदें, मौके पर कास्तकारी कब्जा जैसे सबूत- दस्तावेज हम गरीबों के पास है।

हम सब लोग शासन-प्रशासन से कई बार उक्त जमीन का पट्टा देने की गुहार भी लगा चुके हैं ।

किंतु आज तक हम लोगों को पटटा नहीं दिया गया।

बल्कि हम लोगों के गुजर बसर का जरिया ये पुश्तैनी जमीन केन बेतवा लिंक परियोजना के नाम से जबरन राजस्व विभाग दमोह द्वारा पन्ना टाइगर रिजर्व बफर जोन प्रबंधन को दिये जाने की कार्यवाही की जा रही है।

वर्तमान में हम गरीबों के विरोध के बावजूद भी वन विभाग के रेंजर, बीट गार्ड एवं राजस्व विभाग के आरआई ,पटवारी आदि के द्वारा काबिज जमीन का जबरन सीमांकन किया जा रहा।

सुजात खान, मुखिया पथसू आदिवासी, लल्लू सिंह आदिवासी, गोविन्द गौड़ ने बताया की पूर्व में भी मडि़यादो क्षेत्र के इन भोले भाले, अनपढ़ आदिवासियों को गुमराह करके धोके मे रख कर पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन के नाम पर आदिवासियों की बर्षों से काबिज वन भूमि छीनी जा चुकी है ।

अब इनकी राजस्व की कृषि भूमिभी छीनने का प्रयास किया जा रहा है। एवं इन गरीबों के जीवन को नारकीय बनाया जा रहा है ।

शासन प्रशासन की इस गतिविधि से प्रभावित ग्रामीणों में वर्तमान मे भारी आक्रोश व्याप्त है ।

एकता परिषद एवं ग्रामीणों नेइस मुददे पर शीघ्र बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

Related Articles

Back to top button