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*प्रशासनिक अनदेखी से भूख विलास से तड़प रही गौ माता लापरवाही और अनदेखी नहीं होगा अब बर्दाश्त : अनुज गौतम*

अनुपपुर जिला मध्यप्रदेश

प्रशासनिक अनदेखी से भूख विलास से तड़प रही गौ माता

लापरवाही और अनदेखी नहीं होगा अब बर्दाश्त : अनुज गौतम

ग्राम पंचायत सारंगढ़ में गौशाला की स्थिति दयनीय, भूख से तड़प दम तोड़ रही गौ माता

वरिष्ठ पत्रकार संतोष चौरसिया के साथ संभागीय ब्यूरो चीफ चन्द्रभान सिंह राठौर कि कलम से

जमुना कोतमा भाजपा सरकार आने के बाद से गांव गांव में लाखों की लागत से गौशाला का निर्माण कराया गया वही आवारा पशु और सड़कों पर विचरण करने वाले गाय भैंस एवं अन्य पशुओं के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के तौर पर लाखों के निर्माण से गौशाला बनवाई गई और उसका देखरेख का जिम्मा ग्राम पंचायत को दिया गया। पर ग्राम पंचायत गौशाला के प्रति अनदेखी और लापरवाही के कारण प्रतिदिन कई गायों की मृत्यु अनूपपुर जिले अंतर्गत हो रही है।

ठीक ऐसा ही हाल कोतमा जनपद के ग्राम पंचायत सारंगढ़ का है जहां दो दिवस पूर्व 3 गौ गोत्र के पशु खत्म हुए थे। जिसके बाद भी ग्राम पंचायत द्वारा लापरवाही बरती गई और पशुओं को भोजन पानी की व्यवस्था नहीं की गई जिससे अभी भी पशुओं की स्थिति दयनीय हो गई है।

लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त : अनुज

ग्राम पंचायत सारंगढ़ अंतर्गत गौशाला के निरीक्षण करने गए बजरंग दल के प्रखंड संयोजक अनुज गौतम ग्राम पंचायत स्थित गौशाला की स्थिति का जायजा लिया। जहां उन्होंने पाया कि भोजन और पानी की उचित व्यवस्था ना होने के कारण गौमाता है दम तोड़ रही हैं वही कई गायों की स्थिति बहुत ही दयनीय थी जिसकी जानकारी फोन पर ग्राम पंचायत सचिव एवं कोतमा एसडीएम साथ ही पशु विभाग के डॉ चौहान से बात कर गौशाला की दयनीय स्थिति के बारे में बताया और साथ ही जल्द से जल्द पशुओं को पशु चिकित्सा देकर स्वस्थ करवाने की बात कही।

अनुज ने बताया कि जब इस संदर्भ में सचिव से बात की गई तो उन्होंने आजीविका समूह के तहत पशुओं के देखरेख की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया।

वही दो गाय सारंगढ़ के गौशाला के गेट में भूख प्यास से दम तोड़ने के करीब पहुंच चुकी हैं जिसकी देखरेख के लिए ना तो कोई पंचायत का व्यक्ति वहां स्थित था और ना ही कोई आजीविका समूह के व्यक्ति उपरोक्त स्थान पर देखरेख कर रहा था साफ तौर पर जाहिर है कि गौशाला के नाम पर आने वाले फंड को पंचायत द्वारा राशि का आहरण कर डकार लिया जा रहा है ना तो पशुओं को खाने को भोजन मिल पा रहा है और ना ही साफ – सुथरा पानी की व्यवस्था की जा रही है अगर जल्द ही ऐसी व्यवस्था पशुओं को नहीं की जाती है तो विवश होकर प्रशासन के विरुद्ध आंदोलन किया जाएगा।

ग्राम पंचायत की रहती है व्यवस्थाएं

गौशाला की सारी व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी में होती हैं लेकिन यहां तो मामला उल्टा है सचिव फोन उठाने को तैयार नहीं है वही गौशाला के जिम्मेवार ना तो गौशाला में दिखाई दे रहे हैं और ना ही आसपास के कहीं समाजसेवी उक्त गौशाला की देखरेख में नजर आ रहे हैं। गौ माता के नाम पर वोट लेने वाली भाजपा सरकार के नुमाइंदे भी आसपास की गौशाला की देखरेख में ना तो कभी जाते हैं और ना ही गौशाला में बंद गौ माता की सेवा के लिए किसी प्रकार के सामाजिक कार्य करते हैं यही हालत जिले की अन्य गौशाला की भी है जहां बिना खाना पानी के गांव माताएं और पशु दम तोड़ रहे हैं देखने वाला कोई नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आजीविका समूह द्वारा गायों की देखरेख का जिम्मा लिया गया है लेकिन या तो सिर्फ कागज मात्र में गायों की देखरेख की जाती है बाकी प्रशासन से देखरेख में और भोजन में आने वाला बजट पंचायत और आजीविका का समूह के लोगों द्वारा मिल बांट कर खा लिया जाता है।

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