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उदारी नदी में अवैध रेत उत्खनन फिर तेज, नियमों को ताक पर रखकर मशीनों से हो रही खुदाई

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

उदारी नदी में अवैध रेत उत्खनन फिर तेज, नियमों को ताक पर रखकर मशीनों से हो रही खुदाई

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

बिना अनुमति भारी मशीनों का इस्तेमाल, आधी रात में रेत उठाव जनता ने उठाई आवाज, कड़ी कार्रवाई की मांग

छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत उदारी नदी में एक बार फिर अवैध रेत उत्खनन का कारोबार धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ता नजर आ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों एवं जागरूक नागरिकों ने इस मामले में खुलकर आवाज उठाई है और नियमों के विरुद्ध रेत उत्खनन कर रही एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन और पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

सरकारी नियमों के अनुसार नदी से रेत उत्खनन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हैं। बिना वैध अनुमति भारी मशीनों जैसे पोकलेन, जेसीबी आदि का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद उदारी नदी के बीचों-बीच बड़े-बड़े मशीनों से खुदाई की जा रही है, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि नदी के अस्तित्व और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मलगडोल पंचायत क्षेत्र में भंडारण के नाम पर रेत का उठाव किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि नदी के बीच मशीनों से अवैध खुदाई कर रेत निकाली जा रही है।

यह कार्य पूरी तरह नियमों के विपरीत है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि एजेंसी के पास उत्खनन की अनुमति है, तो क्या उसमें मशीनों से खुदाई की इजाजत दी गई है? इस पूरे मामले पर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदारों द्वारा जबरन डर-धमकाकर रेत उत्खनन किया जा रहा है और कई स्थानों पर अवैध रूप से कब्जा भी किया जा रहा है। सरकार एक ओर दावा करती है कि अवैध रेत उत्खनन पर सख्ती बरती जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।

हर जगह नियमों के विपरीत रेत का उठाव हो रहा है और प्रशासन मौन दिखाई दे रहा है।

सबसे गंभीर बात यह है कि आधी रात में रेत का अवैध उठाव किया जाता है, जिसकी जानकारी आम लोगों को तक नहीं हो पाती। रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी वाहनों से रेत परिवहन किया जाता है

जिससे प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

ग्राम पंचायतों के क्षेत्र में इस तरह के मनमाने और नियमविरुद्ध कार्यों को रोक पाना आसान नहीं हो रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन को संयुक्त रूप से सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।

जनता की स्पष्ट मांग है कि अवैध रेत उत्खनन में लिप्त एजेंसियों और ठेकेदारों पर तत्काल कार्रवाई की जाए, दोषियों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।

अब देखना यह होगा कि जनता की आवाज पर प्रशासन कितना संज्ञान लेता है और क्या उदारी नदी को अवैध रेत उत्खनन से बचाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

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