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सगरा पंचायत में जंग खा रही सौर ऊर्जा योजना, पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण वासी

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

सगरा पंचायत में जंग खा रही सौर ऊर्जा योजना, पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण वासी

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

जैंती पंचायत के नाम पर स्वीकृत सौर ऊर्जा पीएचसी विभाग की लापरवाही की भेंट चढ़ी, वर्षों से पड़ी धूल खा रही मशीनें

छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत सगरा में पीएचसी विभाग द्वारा सौर ऊर्जा योजना के नाम पर की गई बड़ी लापरवाही सामने आई है। यह सौर ऊर्जा योजना मूल रूप से जैंती पंचायत के लिए स्वीकृत की गई थी

लेकिन आज तक इसका कोई उपयोग नहीं हो पाया है। योजना की मशीनें सगरा पंचायत में वर्षों से खुले आसमान के नीचे पड़ी हैं, जहां वे जंग खा रही हैं और मिट्टी-धूल में दबती जा रही हैं।

इस गंभीर विषय को लेकर आज जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति श्रीमती सुखमंती सिंह, आम आदमी पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष रज्जू सिंह तथा ग्राम पंचायत सगरा की सरपंच ने संयुक्त रूप से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना जैंती पंचायत के लिए स्वीकृत थी, लेकिन वहां हैंडपंपों में पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था को आज तक चालू ही नहीं किया गया।

इसके बाद भी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा न तो वैकल्पिक व्यवस्था की गई और न ही योजना को अन्यत्र उपयोग में लाने पर कोई विचार किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार हर मंच से “हर घर जल” और “विकास की गंगा” बहाने के दावे कर रही है,

वहीं दूसरी ओर धरातल पर हालात बिल्कुल विपरीत हैं। सगरा पंचायत सहित आसपास के गांवों में ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारी-कर्मचारी की मिलीभगत और उदासीनता के चलते करोड़ों की योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं।

गरीब मजदूर और किसान अपने हक और अधिकार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। वर्षों से पड़ी सौर ऊर्जा मशीनें न केवल सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि जमीनी स्तर पर योजनाओं की निगरानी कितनी कमजोर है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और सौर ऊर्जा योजना को तत्काल चालू कर ग्रामीणों को पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन के लिए भी मजबूर हो सकते हैं।

सरकार के विकास के दावों के बीच सगरा पंचायत की यह तस्वीर सिस्टम की पोल खोलती नजर आ रही है, जहां योजनाएं मौजूद हैं लेकिन जनता को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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