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मलगडोल में उदारी नदी से खुलेआम अवैध रेत उत्खनन, ओवरलोड परिवहन पर एजेंसी एवं प्रशासन मौन

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

मलगडोल में उदारी नदी से खुलेआम अवैध रेत उत्खनन, ओवरलोड परिवहन पर एजेंसी एवं प्रशासन मौन

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

सरपंच–जनप्रतिनिधियों पर मिलीभगत के आरोप, ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

भरतपुर (एमसीबी)
छत्तीसगढ़ राज्य के एमसीबी जिला अंतर्गत भरतपुर विकास खण्ड की ग्राम पंचायत मलगडोल में उदारी नदी से खुलेआम अवैध रेत उत्खनन और ओवरलोड परिवहन का मामला लगातार सामने आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेत का यह अवैध कारोबार दिन-ब-दिन फलता-फूलता जा रहा है, जबकि संबंधित एजेंसी और शासन-प्रशासन पूरी तरह मौन साधे हुए है।

ग्रामीणों के अनुसार मलगडोल में जिस रेत खदान की स्वीकृति साधारण रेत के नाम पर दी गई थी, उसी की आड़ में भारी मशीनों और बड़े-बड़े वाहनों के जरिए नियमों को ताक पर रखकर रेत का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच, पंच एवं कुछ जनप्रतिनिधि ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर ग्रामवासियों को उनके हक और अधिकारों से वंचित कर रहे हैं।

ग्रामवासियों का कहना है कि ग्राम पंचायत के नाम पर स्वीकृत रेत खदान को निजी फायदे के लिए ठेकेदारों के साथ गलत तरीके से एग्रीमेंट कर दिया गया है, जो पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। इससे न केवल पंचायत की संपत्ति का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उदारी नदी में जलस्तर लगातार घट रहा है, नाले गहरे होते जा रहे हैं और भविष्य में पानी की भारी समस्या उत्पन्न होने की आशंका बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस अवैध उत्खनन की शिकायत कई बार शासन-प्रशासन से की, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ओवरलोड रेत से भरे भारी वाहनों के कारण गांव की सड़कें मात्र 15 दिनों के भीतर ही जर्जर अवस्था में पहुंच गई हैं, जिससे आम जनता को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि गांव का कोई भी व्यक्ति रेत बेचने के पक्ष में नहीं है और सभी इसका विरोध कर रहे हैं, बावजूद इसके ठेकेदार प्रशासन के संरक्षण में ग्रामीणों को डरा-धमकाकर मनमाने तरीके से रेत का परिवहन कर रहे हैं। इससे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि अवैध रेत उत्खनन और ओवरलोड परिवहन पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, यदि नियमों के अनुसार रेत उत्खनन करना है तो ग्रामसभा की सहमति और शासन के दिशा-निर्देशों के तहत ही किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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