पांच वर्षों से अधूरा पड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र भवन, ग्रामीण आज भी मूल स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित
तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

पांच वर्षों से अधूरा पड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र भवन, ग्रामीण आज भी मूल स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित
(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)
गोधौरा ग्राम पंचायत में शासन की स्वीकृत योजना पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने स्वास्थ्य मंत्री से की हस्तक्षेप की मांग
भरतपुर (एमसीबी)
छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकास खण्ड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुंवारपुर के अधीन ग्राम पंचायत गोधौरा में उप स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण की स्वीकृति लगभग पांच वर्ष पूर्व शासन द्वारा दी गई थी। परंतु आश्चर्यजनक रूप से इतने लंबे समय बीत जाने के बाद भी यह भवन आज तक अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश और निराशा व्याप्त है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उप स्वास्थ्य केंद्र भवन अधूरा रहने के कारण शासन की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों तक नहीं पहुंच पा रहा है। आज भी ग्रामीणों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए लगभग 40 किलोमीटर दूर अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में जाना पड़ता है, जिससे समय, धन और श्रम की भारी बर्बादी हो रही है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि भवन निर्माण की स्थिति आज भी वैसी ही है, जैसा वर्षों पहले छोड़ दिया गया था। अधूरा ढांचा शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भवन निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी थी, तो फिर आज तक इसे पूर्ण क्यों नहीं कराया गया। यह लापरवाही सीधे-सीधे क्षेत्र की जनता को मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित कर रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच कर जल्द से जल्द उप स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाए, ताकि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सके। ग्राम पंचायतवासियों ने स्वास्थ्य मंत्री छत्तीसगढ़ शासन से भी अपील की है कि वे स्वयं इस विषय में हस्तक्षेप कर भवन निर्माण को शीघ्र पूर्ण कराएं और क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराएं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उप स्वास्थ्य केंद्र का संचालन प्रारंभ हो जाता है, तो क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा और शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंच सकेगा।
अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक ठोस कदम उठाता है




