मनरेगा कूप निर्माण में मजदूरी पर डाका इंजीनियर-रोजगार सहायक पर मिलीभगत का आरोप
तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

मनरेगा कूप निर्माण में मजदूरी पर डाका इंजीनियर-रोजगार सहायक पर मिलीभगत का आरोप
(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास रिपोर्ट)
डोगरीटोला में गरीब मजदूरों का हक छीने जाने की शिकायत, मास्टर रोल से नाम हटाने और धमकी देने का भी आरोप
एमसीबी/भरतपुर (छत्तीसगढ़)।
छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकासखंड के ग्राम डोगरीटोला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत चल रहे कूप निर्माण कार्य को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों एवं मजदूरों का कहना है कि इंजीनियर और रोजगार सहायक की मिलीभगत से गरीब परिवारों के मजदूरों की मेहनत की कमाई पर “डाका” डाला जा रहा है।
ग्रामीण मजदूरों ने बताया कि मनरेगा योजना का उद्देश्य जहां गरीब परिवारों को रोजगार देकर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना है, वहीं दूसरी ओर डोगरीटोला में मजदूरों के साथ कथित रूप से अन्याय और शोषण किया जा रहा है।
मूल्यांकन के समय कुछ नहीं, लेकिन MIS में कटौती!
ग्राम पंचायत के एक सदस्य ने जानकारी देते हुए बताया कि जब कूप निर्माण कार्य का मूल्यांकन करने के लिए इंजीनियर आते हैं, तब मजदूरों को स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया जाता कि उनकी खुदाई या “गोड़ी” कम है, अथवा उन्हें कितनी और खुदाई करनी है।

मजदूरों का आरोप है कि मौके पर काम पूरा कराने के बाद जब एमआईएस (MIS) अपलोड की जाती है, तब अचानक मजदूरी में कटौती कर दी जाती है। इससे मजदूरों को समय पर पूरी मजदूरी नहीं मिल पाती और उन्हें मानसिक रूप से भी परेशान किया जाता है।
112 रुपये प्रतिदिन दिखाकर मजदूरों को किया जा रहा गुमराह?
ग्रामीणों का कहना है कि मास्टर रोल में मजदूरों की मजदूरी 112 रुपये प्रतिदिन की दर से दर्शाई जा रही है, लेकिन वास्तविक भुगतान में कटौती कर मजदूरों के साथ धोखा किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मजदूरों की हाजिरी और भुगतान की जानकारी मास्टर रोल में देखने पर कुछ और दिखाई देती है, जबकि मजदूरों के खाते में पैसा कम भेजा जाता है।
शिकायत करने पर धमकी और नाम गायब करने का आरोप
सबसे चिंताजनक बात यह है कि मजदूरों ने आरोप लगाया कि जब कोई मजदूर अपने हक-अधिकार की आवाज उठाता है, तो उसका नाम मास्टर रोल से गायब कर दिया जाता है।
मजदूरों का कहना है कि उन्हें धमकाया भी जाता है और कहा जाता है—
जहां शिकायत करना हो कर दो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
ऐसे माहौल में गरीब मजदूरों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि वे आखिर शिकायत किससे करें और कहां जाए
15 वर्षों से जमे इंजीनियर पर उठे सवाल
ग्रामवासियों का आरोप है कि संबंधित इंजीनियर पिछले 15 वर्षों से एक ही क्षेत्र में जमे हुए हैं, जिस कारण उनका प्रभाव इतना बढ़ गया है कि उनके खिलाफ आवाज उठाने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी कई बार इंजीनियर के खिलाफ शिकायतें उठाई गईं, लेकिन आज तक किसी प्रकार की ठोस जांच या कार्रवाई नहीं हो सकी।
ग्रामीणों की मांग—जांच हो, मजदूरी का भुगतान मिले, दोषियों पर कार्रवाई हो
ग्रामवासियों और मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि—
* कूप निर्माण कार्य की स्थल जांच कराई जाए
* मजदूरों के मास्टर रोल, माप पुस्तिका (MB) और MIS का मिलान किया जाए
* जिन मजदूरों की मजदूरी काटी गई है, उन्हें पूरा भुगतान कराया जाए
* मजदूरों को धमकाने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो
* मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए निगरानी टीम बनाई जाए
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी जनहितकारी योजना अगर भ्रष्टाचार और मिलीभगत की भेंट चढ़ेगी, तो गरीब मजदूरों का भरोसा टूट जाएगा और शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर मजदूरों की आवाज यूं ही दबा दी जाएगी।




