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धान खरीदी केंद्र गढ़वार में किसानों के साथ अन्याय टोकन होने के बावजूद नहीं हो रही पूरी धान किसान दर-दर भटकने को मजबूर

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

धान खरीदी केंद्र गढ़वार में किसानों के साथ अन्याय टोकन होने के बावजूद नहीं हो रही पूरी धान किसान दर-दर भटकने को मजबूर

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

एमसीबी/भरतपुर।
छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकासखंड के धान खरीदी केंद्र गढ़वार में किसानों के साथ शासन–प्रशासन की मिलीभगत से गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि जिन किसान भाइयों के धान खरीदी के लिए टोकन काटे गए हैं, उनके निर्धारित रेशियो के अनुसार धान की खरीदी नहीं की जा रही, जिससे किसान अत्यंत परेशान और आक्रोशित हैं।

किसानों का कहना है कि शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत, धान का सत्यापन खेतों में किया जा रहा है, जबकि यह कार्य नियमानुसार खरीदी केंद्रों में होना चाहिए। खेतों में किए जा रहे इस सत्यापन में भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। पटवारी द्वारा किया जा रहा सत्यापन वास्तविक उत्पादन से मेल नहीं खा रहा, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इस संबंध में किसानों ने तहसीलदार कुंवरपुर से फोन के माध्यम से संपर्क कर अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन किसानों का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा किसी प्रकार का संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया गया। टोकन कटने के बावजूद रेशियो के अनुसार धान खरीदी न होने से किसान अपना पूरा धान बेचने के लिए खरीदी केंद्र के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

किसानों ने बताया कि पटवारी धनंजय साहब से जब इस विषय में चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें प्रति एकड़ केवल 18 क्विंटल धान खरीदी का आदेश मिला है, जबकि सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से यह वादा किया गया था कि प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जाएगी। वास्तविकता यह है कि कई किसानों की आधी-अधूरी खरीदी कर उन्हें वापस लौटा दिया जा रहा है।

स्थिति यह है कि वर्तमान में कम से कम 24 किसान ऐसे हैं, जो धान बेचने से वंचित रह गए हैं। ये किसान अपनी समस्याएं लेकर कभी एसडीएम कार्यालय तो कभी धान खरीदी केंद्र के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कहीं से उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है।

किसानों का आरोप है कि शासन एक ओर दावा कर रहा है कि प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है, जबकि दूसरी ओर टोकन में ही कम मात्रा दर्ज कर आधी खरीदी की जा रही है। इससे छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। आरोप यह भी है कि छोटे किसानों को परेशान किया जा रहा है, जबकि बड़े किसानों की धान खरीदी आसानी से हो रही है।

इसके साथ ही किसानों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि यह क्षेत्र मध्यप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है, जहां शासन-प्रशासन की मौजूदगी में बाहर का धान छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर खरीदा जा रहा है, जबकि स्थानीय किसानों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।

किसान भाइयों ने क्षेत्र की विधायक श्रीमती रेणुका सिंह जी से मांग की है कि सरकार द्वारा किसानों से जो वादे किए गए थे, उन्हें पूरा किया जाए और प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की निष्पक्ष खरीदी सुनिश्चित की जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को न्याय मिल सके।

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