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जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

दवाइयों से लेकर डॉक्टर तक का अभाव, 100 बिस्तरों वाला अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया

एमसीबी/भरतपुर/जनकपुर।
छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकासखंड स्थित नगर पंचायत जनकपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। अस्पताल में दैनिक व्यवस्थाओं के अभाव के चलते मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली इस कदर बढ़ चुकी है कि आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से भरोसा उठता नजर आ रहा है।

स्थानीय लोगों और मरीजों का आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर में अस्पताल प्रबंधन एवं बीएमओ की लापरवाही खुलकर सामने आ रही है। अस्पताल प्रबंधक का मनमाना रवैया और अधिकारियों की उदासीनता के कारण मरीजों को मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं हो पा रही हैं

मुफ्त दवा के दावे खोखले, मरीज बाहर से खरीदने को मजबूर

मरीजों ने बताया कि डॉक्टर द्वारा जो दवाइयां लिखी जाती हैं, उनमें से आधी-अधूरी दवाइयां ही अस्पताल से दी जाती हैं, जबकि शेष दवाइयां मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।

सरकार जहां एक ओर यह दावा करती है कि सरकारी अस्पतालों में सभी दवाइयां मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं, वहीं जनकपुर अस्पताल की हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।

न भोजन, न कंबल, न पर्याप्त डॉक्टर

अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए न तो भोजन की समुचित व्यवस्था है, न ही कंबल जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। हालात इतने खराब हैं कि 100 बिस्तरों वाला यह अस्पताल केवल नाम का अस्पताल बनकर रह गया है।

जनकपुर से शहडोल रेफर, रास्ते में तोड़ रहे दम

डॉक्टरों की अनुपलब्धता और संसाधनों की कमी के कारण अधिकांश गंभीर मरीजों को मध्यप्रदेश के शहडोल रेफर कर दिया जाता है, जो जनकपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। आरोप है कि कई मरीज इस लंबी दूरी के दौरान ही दम तोड़ देते हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

वर्षों से एक ही डॉक्टर के भरोसे अस्पताल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल के निर्माण के बाद से लेकर आज तक केवल एक डॉक्टर (रमन जी) के भरोसे अस्पताल चलाया जा रहा है। इसके अलावा अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति आज तक नहीं की गई, या यूं कहें कि सरकार द्वारा डॉक्टरों को यहां भेजा ही नहीं जा रहा है। इससे क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने का सपना अधूरा ही रह गया है।

इलाज की जगह बन रहा मौत का केंद्र


जिस अस्पताल का उद्देश्य क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं देना था, वही अस्पताल आज लोगों के अनुसार इलाज की बजाय मौत का कारण बनता जा रहा है। अधिकारियों-कर्मचारियों की मनमानी और लापरवाही से मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।

स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

क्षेत्रवासियों एवं मरीजों ने छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल जी से मांग की है कि वे स्वयं जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति का संज्ञान लें और डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति, दवाइयों की पूरी उपलब्धता, भोजन-कंबल जैसी मूलभूत सुविधाएं तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

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