गोधौरा स्कूलों में मीनू चार्ट की अनदेखी, बच्चों को तय मानक के अनुसार नहीं मिल रहा मध्यान्ह भोजन
तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

गोधौरा स्कूलों में मीनू चार्ट की अनदेखी, बच्चों को तय मानक के अनुसार नहीं मिल रहा मध्यान्ह भोजन
(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)
शनिवार के मीनू में खीर-अंकुरित चना की जगह बना दाल-भात, सोयाबीन बड़ी व आलू सब्जी
टॉयलेट व्यवस्था भी बदहाल, वीडियो में सामने आई अव्यवस्था
गोधौरा (जिला एमसीबी, छत्तीसगढ़): भरतपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोधौरा स्थित पूर्व माध्यमिक शाला एवं प्राथमिक शाला में शासन द्वारा जारी मध्यान्ह भोजन मीनू चार्ट के अनुसार बच्चों को भोजन नहीं मिलने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर यह शिकायत लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन अब तक न तो समूह पर कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही उच्च अधिकारियों द्वारा कोई प्रभावी कदम उठाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाले मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता एवं निर्धारित मीनू चार्ट का पालन नहीं होने से छोटे-छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं स्कूल परिसर में बुनियादी सुविधाओं, खासकर टॉयलेट व्यवस्था की बदहाली भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्रधान पाठक ने दी जानकारी, समूह पर उठे सवाल
विद्यालय प्रशासन से जब इस संबंध में जानकारी ली गई तो प्रधान पाठक ने बताया कि मध्यान्ह भोजन स्व-सहायता समूह (समूह) के माध्यम से बच्चों को दिया जा रहा है। हालांकि प्रधान पाठक का यह भी कहना है कि कई बार विभाग को अवगत कराया गया है कि बच्चों को शासन के मीनू चार्ट के अनुसार भोजन नहीं मिल रहा, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

प्रधान पाठक एवं स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति आज की नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्या है। विद्यालय स्तर से लेकर ग्राम पंचायत तक कई बार सूचना दिए जाने के बाद भी सुधार नहीं होना, व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शनिवार के मीनू में खीर-अंकुरित चना, लेकिन मौके पर बना कुछ और
शासन द्वारा निर्धारित मीनू चार्ट के अनुसार शनिवार के दिन बच्चों को खीर एवं अंकुरित चना दिए जाने का प्रावधान है, ताकि बच्चों को पोषणयुक्त एवं संतुलित आहार मिल सके।
लेकिन जांच/निरीक्षण के दौरान देखा गया कि शनिवार को मीनू चार्ट के अनुसार भोजन न बनाकर दाल-भात, सोयाबीन बड़ी और आलू की सब्जी तैयार की गई थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मीनू चार्ट का पालन न होने से बच्चों को मिलने वाला पोषण स्तर प्रभावित हो रहा है और शासन की योजना का उद्देश्य भी कमजोर पड़ रहा है।
बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई शून्य
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय एवं ग्राम पंचायत स्तर पर कई बार जानकारी देने के बावजूद न तो समूह के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चों को शासन की गाइडलाइन के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा, तो यह सीधे तौर पर बच्चों के अधिकारों का हनन है।
टॉयलेट व्यवस्था बदहाल, छोटे बच्चों को हो रही परेशानी
मामले में दूसरा बड़ा मुद्दा विद्यालय परिसर की टॉयलेट व्यवस्था को लेकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि स्कूल में छोटे बच्चों के लिए उचित शौचालय व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस अव्यवस्था को लेकर वीडियो के माध्यम से भी स्थिति स्पष्ट देखी जा सकती है। टॉयलेट जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव होना स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुरक्षा तीनों के लिहाज से गंभीर मामला है।
शासन की योजना का उद्देश्य हो रहा प्रभावित
मध्यान्ह भोजन योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पोषणयुक्त भोजन देकर शिक्षा के प्रति आकर्षित करना, स्कूल में उपस्थिति बढ़ाना और कुपोषण की समस्या को कम करना है।
लेकिन यदि मीनू चार्ट का पालन नहीं किया जा रहा और व्यवस्थाएं लचर बनी हुई हैं, तो यह योजना केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाती है।
ग्रामीणों की मांग: जांच हो, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई
ग्रामीणों एवं जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि—
* स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की नियमित जांच कराई जाए
* मीनू चार्ट का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो
* दोषी समूह/जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
* स्कूल में टॉयलेट व स्वच्छता व्यवस्था तत्काल दुरुस्त कराई जाए
* बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से कोई समझौता न हो
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल इस मामले में उच्च अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग एवं संबंधित प्रशासन कब तक संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है।




