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धान भुगतान को लेकर सहकारी बैंक में अव्यवस्था, जनकपुर शाखा में किसानों को घंटों भटकना पड़ा

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

धान भुगतान को लेकर सहकारी बैंक में अव्यवस्था, जनकपुर शाखा में किसानों को घंटों भटकना पड़ा

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकासखंड की सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, शाखा जनकपुर में धान खरीदी के भुगतान को लेकर गंभीर अव्यवस्थाएं सामने आई हैं। बैंक से धान का भुगतान लेने पहुंचे किसान भाइयों को पूरे दिन दर-दर भटकना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपने ही मेहनत की कमाई नहीं मिल सकी। इस स्थिति से किसान बेहद नाराज और हताश नजर आए।

जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के अधिकांश किसानों का धान खरीदी का भुगतान इसी सहकारी बैंक के माध्यम से किया जाता है। भुगतान की उम्मीद में दूर-दराज के गांवों से किसान बैंक पहुंचे, लेकिन बैंक में नकदी की कमी बताकर उन्हें वापस लौटा दिया गया। किसानों का आरोप है कि जब उन्होंने बैंक कर्मचारियों से भुगतान को लेकर बातचीत की तो कर्मचारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “बैंक में पैसा नहीं है

आप लोग चले जाइए।” इतना ही नहीं, किसानों के साथ ऊंची आवाज में बातचीत किए जाने और अपमानजनक व्यवहार का भी आरोप लगाया गया है।

किसानों का कहना है कि सहकारी केंद्रीय बैंक के कर्मचारी लगातार किसानों के साथ अन्याय कर रहे हैं। भुगतान न होने के साथ-साथ डरावल पर्ची (दस्तावेजी प्रक्रिया) के नाम पर भी किसानों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। वहीं, कुछ समय पहले तक एटीएम के माध्यम से भी किसानों को सही तरीके से राशि नहीं मिल पा रही थी, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ गईं।

गौरतलब है कि भरतपुर विकासखंड में यही एक प्रमुख सहकारी बैंक है, जहां बड़ी संख्या में किसान भुगतान के लिए निर्भर रहते हैं। कई किसान लगभग 40 से 50 किलोमीटर दूर से पैदल या साधनों से बैंक पहुंचते हैं। बैंक में लंबी कतारों और देर शाम तक इंतजार के बाद भी जब भुगतान नहीं होता, तो किसानों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। कई बार तो बैंक में राशि जमा होने तक रात हो जाती है, जिससे किसानों को आने-जाने और सुरक्षा दोनों को लेकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

किसानों ने इस पूरी व्यवस्था को किसान विरोधी बताते हुए सरकार पर भी सवाल खड़े किए हैं।

किसानों का कहना है कि सरकार दोहरे इंजन की सरकार होने का दावा तो कर रही है

लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

धान बेचने के बाद भी अगर किसान अपने ही पैसे के लिए परेशान हों, तो यह व्यवस्था की बड़ी नाकामी है।

किसानों की मांग
किसानों ने प्रशासन और बैंक प्रबंधन से मांग की है कि

* बैंक में काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाए
* पर्याप्त मात्रा में नकदी की व्यवस्था की जाए,
* कर्मचारियों को किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के निर्देश दिए जाएं,

* ताकि किसान समय पर भुगतान लेकर सुरक्षित रूप से अपने घर लौट सकें और उन्हें अपने ही पैसे के लिए परेशान न होना पड़े।

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो किसानों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

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