Breaking Newsअन्य राज्यआगराइंदौरइलाहाबादउज्जैनउत्तराखण्डगोरखपुरग्राम पंचायत बाबूपुरग्वालियरछत्तीसगढ़जबलपुरजम्मू कश्मीरझारखण्डझाँसीदेशनई दिल्लीपंजाबफिरोजाबादफैजाबादबिहारभोपालमथुरामध्यप्रदेशमहाराष्ट्रमेरठमैनपुरीयुवाराजस्थानराज्यरामपुररीवालखनऊविदिशासतनासागरहरियाणाहिमाचल प्रदेशहोम

जमथान पंचायत में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और फर्जी पट्टों का मामला आया सामने

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

जमथान पंचायत में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और फर्जी पट्टों का मामला आया सामने

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

भरतपुर (एमसीबी)।
विकासखंड भरतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत जमथान में शासकीय भूमि पर हो रहे अतिक्रमण और फर्जी पट्टों के मामले ने तूल पकड़ लिया है।

ग्राम पंचायत के चांटी बैरियल स्थित शासकीय जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।

मिली जानकारी के अनुसार, इस भूमि को शासन की ओर से नर्सरी तैयार करने हेतु सुरक्षित रखा गया है। लेकिन कुछ लोगों द्वारा यहां कब्जे की कोशिश की जा रही है।

इस पर कुंवरपुर नायब तहसीलदार एवं हल्का पटवारी ने ग्रामीणों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यह जमीन शासकीय है,

जिस पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने जबरन कब्जा किया तो शासन के निर्देशानुसार बुलडोज़र चलाकर अतिक्रमण हटाया जाएगा।

फर्जी पट्टों का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि इस जमीन पर शासन और संबंधित कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी पट्टे जारी किए गए हैं।

ग्रामवासियों का आरोप है कि 2016-17 में जब ग्राम पंचायत की सीमांकन प्रक्रिया पूरी की गई थी, उस समय इस जमीन पर किसी का भी पट्टा मौजूद नहीं था। इसके बावजूद अब अचानक तीन से चार लोगों को पट्टे जारी कर दिए गए हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि बार-बार मांग करने के बावजूद ग्राम पंचायत को आज तक पट्टों की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका कहना है कि शासन के अधिकारी और कर्मचारी आपसी सांठगांठ कर शासकीय भूमि पर कब्जा कराने की कोशिश कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आक्रोश और मांग

ग्रामवासियों ने साफ कहा है कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने शासन से मांग की है कि—

1. फर्जी पट्टा देने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तत्काल जांच की जाए।

2. दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

3. शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर वहां पर नर्सरी तैयार की जाए, जिससे गांव के बच्चों और किसानों को लाभ मिल सके।

रखवा नंबरों में अनियमितता

ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में यह भूमि रखवा नंबर 39 और 147/1 के नाम से दर्ज थी। लेकिन वर्तमान समय में अजीब तरह से बदलाव कर चार लोगों के नाम पर पट्टे जारी कर दिए गए हैं। इस गड़बड़ी को लेकर गांव में गहरा असंतोष है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने जल्द ही कार्रवाई नहीं की तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे और इस भूमि को बचाने के लिए संघर्ष करेंगे।

Related Articles

Back to top button