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जिला पंचायत सदस्य एवं जिलाध्यक्ष ने किया निरीक्षण, सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

जिला पंचायत सदस्य एवं जिलाध्यक्ष ने किया निरीक्षण, सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

जमथान की पूर्व माध्यमिक शाला की बदहाल स्थिति उजागर

जिला पंचायत सदस्य एवं आप जिलाध्यक्ष ने किया निरीक्षण, सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

भरतपुर (एमसीबी)।
छत्तीसगढ़ राज्य के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के अंतर्गत आने वाले विकासखंड भरतपुर की ग्राम पंचायत जमथान स्थित पूर्व माध्यमिक शाला की स्थिति पर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। शुक्रवार को विद्यालय का निरीक्षण करने पहुंचे जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुखमंती सिंह एवं आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष श्री रमाशंकर मिश्रा ने विद्यालय की दुर्दशा का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान विद्यालय भवन की जर्जर हालत, शौचालयों की बदहाली, बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था का अभाव, शिक्षकों की कमी तथा मूलभूत सुविधाओं के अभाव जैसे गंभीर मुद्दे सामने आए। मौके पर मौजूद अभिभावकों एवं ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याओं को प्रतिनिधियों के समक्ष खुलकर रखा।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। बच्चों को खुले आसमान तले या टूटी-फूटी कक्षाओं में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुखमंती सिंह ने कहा कि “शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने का वादा करने वाली सरकार की हकीकत गांव-गांव में ऐसे ही स्कूलों के रूप में दिखाई दे रही है। यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”

वहीं,आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष रमाशंकर मिश्रा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि, “डबल इंजन की सरकार शिक्षा के क्षेत्र में पूरी तरह विफल है। राजधानी और मंचों से बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। अगर यही हाल रहा तो शिक्षा का स्तर और भी नीचे गिर जाएगा।”

निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के समय विद्यालय भवन की छत टपकती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। साथ ही विद्यालय परिसर में साफ-सफाई और पेयजल की उचित व्यवस्था भी नहीं है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के समक्ष उठाने की बात कही है, साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।

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