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मंत्री श्री परमार ने कहा स्‍वदेशी वैज्ञानिक अनुसंधान का दस्‍तावेजीकरण किया जाये

जिला जबलपुर मध्य प्रदेश

मंत्री श्री परमार ने कहा स्‍वदेशी वैज्ञानिक अनुसंधान का दस्‍तावेजीकरण किया जाये

(पढिए राजधानी एक्सप्रेस न्यूज़ हलचल आज की सच्ची खबरें)

महाकौशल विज्ञान परिषद द्वारा आयोजित 18 वीं जिज्ञासा 2024 संपन्न

मध्य प्रदेश जिला जबलपुर में प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने आज पशु चिकित्‍सा महाविद्यालय सिविल लाईन के सभागार में महाकौशल विज्ञान परिषद द्वारा आयोजित 18वीं जिज्ञासा 2024 के समापन समारोह में शामिल हुए।

इस दौरान मंत्री श्री परमार ने भारतीय विज्ञान से विकसित भारत की संकल्‍पना पर विचार व्‍यक्‍त करते हुए विज्ञान के लोक व्‍यापीकरण पर अपने विचार दिये। उन्‍होंने कहा

भारतीय समाज पुरातन काल से वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखा है और उस आधार पर प्राकृतिक तत्‍वों का पूजन की पद्धति विकसित हुई। उन्‍होंने कहा कि हमारे पूर्वज विज्ञान के सत्‍य को बहुत पहले पहचान चुके थे और इसी का भारतीय संस्‍कृति में जगह-जगह झलक दिखाई देती है। उन्‍होंने सूर्य, जल व वृक्षों की पूजा का उदाहरण भी दिया।

मंत्री श्री परमार ने कहा कि भारतीयों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण इतना विकसित था कि कोई भी वृक्षों के महत्‍व के बारे में आसानी से बता देगा। साथ ही कहा कि अब आवश्‍यकता है स्‍वदेशी वैज्ञानिक परम्‍परा का दस्‍तावेजीकरण किया जाये।

भारत की वैज्ञानिक संस्‍कृति लाखों साल पुरानी है। उन्‍होंने कहा कि भारत का इतिहास गलत तथ्‍यों के आधार पर लिखा गया है

जबकि भारत के लोग ऐसे लोहा बनाते थे जिसमें जंग नहीं लगती थी। उन्‍होंने अगत्स्‍य संहिता का उदाहरण देकर कहा कि भारत ने ही सबसे पहले सेल का निर्माण कर वैज्ञानिक परम्‍परा को जारी रखा।

तेरहवीं सदी में भारत के आर्किटेक्‍ट बालबाहू ने बीजिंग शहर का डिजाईन में मदद की थी।

परमाणु परीक्षण करके भारत ने दुनिया में अपनी शक्ति का लोहा मनवाया।

भारत के वैज्ञानिक ऊर्जा के महत्‍व को बहुत पहले से पहचान चुके है

अब इसे साकार रूप में लाना है और 2047 तक भारत को ऊर्जा प्रदाता तथा विश्‍व के भरण पोषण करने वाला देश बनाया जायेगा।

कार्यक्रम के दौरान रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय, नानाजी देशमुख पशु चिकित्‍सा विज्ञान विश्‍वविद्यालय, जेएनकेव्‍हीव्‍ही के कुलगुरू तथा महाकौशल विज्ञान परिषद के अध्‍यक्ष सहित बड़ी तादात में गणमान्‍य नागरिक उपस्थित थे।

कार्यक्रम का उद्देश्‍य स्‍वदेशी विज्ञान को प्रोत्‍साहित करना तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करना था।

जिज्ञासा 2024 अंतर्गत 78 स्‍कूलों के 1300 विद्यार्थियों ने विज्ञान प्रतियोगिता में भाग लिया तथा उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को इस दौरान सम्‍मानित भी किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्‍जवलित कर किया गया।

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