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*जैतहरी,संयुक्त ठेकेदारी मजदूर यूनियन सीटू ने सौपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन 3

तहसील जैतहरी जिला अनुपपुर मध्य-प्रदेश

जैतहरी,संयुक्त ठेकेदारी मजदूर यूनियन सीटू ने सौपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन।

भ्रष्टाचार और गरीबों, मजदूरों के ऊपर हो रहे शोषण को रोकने के मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

संभागीय ब्यूरो चीफ चन्द्रभान सिंह राठौर कि कलम से

अनूपपुर/जैतहरी

संयुक्त ठेकेदारी मजदूर यूनियन सीटू ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए विभिन्न मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है इसमें प्रधानमंत्री को संदेश देने के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व जैतहरी को ज्ञापन सौंप इन के माध्यम से प्रधानमंत्री संसद भवन भारत सरकार नई दिल्ली तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए ज्ञापन सौंपते हुए उन्हें गरीब,मजदूर और असहाय पर हो रहे भ्रष्टाचार को दिखाने का कार्य करते हुए जैतहरी में वर्तमान स्थिति को बताने का कार्य कर रही है।

इस प्रकार है ज्ञापन

प्रति,
माननीय प्रधानमंत्री,
संसद भवन भारत सरकार नई दिल्ली।
ज्ञापन
द्वारा:- श्रीमान् अनुविभागीय अधिकारी राजस्व जैतहरी जिला अनूपपुर (म0प्र0)।
मान्यवर,
देश को आजाद हुये 74 साल बीत गये है। अगले साल हम आजादी की 75वी जायंती मनाने जा रहे है। आज से 79 साल पूर्व 9 अगस्त 1942 को इसी दिन करो या मरो के संकल्प के साथ अंग्रेजो भारत छोडो का नारा दिया गया था। उसके पांच साल के भीतर अंग्रेजी साम्राज्यवादी हुकूमत को भारत छोडना पडा। इस आजादी के लिये हजारो-लाखो देशवासियो ने अपना सबकुछ कुरबान किया। हमारे पुरखो ने यह कुरबानी क्यो दी थी उनका सपना था कि एक नये भारत का निर्माण होगा, जिसमे हम खुद अपने मालिक होंगें। हमारे खुद के उद्योग-धंधे होंगें खुद के वित्तीय संसाधन होंगें। खुद का शासन होगा और अगली पीढियो के लिये एक खुशहाल जीवन होगा। पर आज हमारे सामने एक नई गुलामी की चुनौती खडी है सरकार देश के सभी संसाधनो, उद्योगो, कल-कारखानो, खाद्यानो, बैंको, बीमा कंपनियो, रेल, सेना के लिये हथियार बनाने वाले उद्यमों यहा तक की खेती-किसानी और तमाम प्राकृतिक संसाधनो तक को चंद देशी-विदेशी मुनाफाखोर कार्पाेरेट के हवाले कर रही है। हमारे पुरखो के बलिदानो से प्राप्त आजादी को फिर से इन मुनाफाखोरो के हवाले करने के लिये तमाम नीति व तमाम कानून लागु कर जनतंत्र का गला घोटने जा रहे है। इन बीते वर्षाे मे हमारे मजदूरो किसानो और अन्य मेहनतकश लोगो की कडी मेहनत के चलते कई क्षेत्रो मे हमने प्रगति की है, पर इस प्रगति का लाभ उनकी पहुच से बाहर है। हमारे देश की मेहनतकश जनता ने अपने संघर्षो एवं बलिदानो के माध्यम से जो थोडा लाभ हासिल किया था वह भी छीना जा रहा है। हमने अपने सार्वजनिक क्षेत्र के माध्यम से जो उत्पादक क्षमता और आत्मनिर्भरता हासिल की थी, उसे खत्म किया जा रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र, हमारे देश की संपदा और हमारे प्राकृतिक संसाधनो को देशी-विदेशी निजि क्षेत्र की कम्पनीयो को कौडियों के मोल सौपा जा रहा है।
आपके नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता मे आने के बाद से तो इस प्रक्रिया ने और तेज गति पकडी है। कोविड-19 महामारी के दौरान अपने यह चरम पर पहुच गया है। इस अवधि के दौरान जब जनता पीडित थी, जब करोडो लोगो की नौकरी और आय खत्म हो गई और उन्हे भूख और गरीबी मे धकेल दिया गया तब सरकार ने उन्हे राहत देने के लिये कुछ नही किया। इसी अवधि के दौरान हमारे छोटे किसान पर आधारित खेती को कार्पोरेट कृषि मे बदलने के उद्देश्य से कृषि कानून पारित किये गये, मजदूरो को संगठित करने और सामुहिक रूप से उनके अधिकारो के लिये लडने के उनके मूल अधिकारो से बंचित करने के लिये श्रम संहिताएं पारित की गई। इसी दौर मे समूचे सार्वजनिक क्षेत्र को तबाह किया जा रहा है।सरकार के तानाशाही और निरंकुश कदमो के माध्यम से सभी विरोधो का दमन करते हुए, इन नीतियो को आगे बढाना चाहती है। अपनी नीतियो के खिलाफ असंतोष की आवाज को दमन करने के लिये राजद्रोह कानून, यूएपीए आदि का उपयोग, हडताल पर प्रतिबंध लगाने के लिये आवश्यक प्रतिरक्षक सेवा अध्यादेश की घोषणा-यह सब आजादी के पूर्व के औपनिवेशिक शासन की याद दिलाती है। राज्य मशीनरी और प्रशासन के विभिन्न अंगो का उपयोग सरकार और उसके नेता का विरोध करने वालो को डराने के लिये किया जा रहा है। नेता को ही राष्ट्र बताया जा रहा हैं। पत्रकारो, बुद्धजीवियो, कार्यकर्ताओ को जेल मे डाल दिया जाता है और जमानत से भी इनकार कर दिया जाता है।
हमारी संघ सरकार के उपरोक्त कदमो पर अपत्ति एवं विरोध करती है एवं सरकार से यह मांग करती है कि उपरोक्त कार्यवाहियो पर रोक लगाया जाकर निम्नांकित मांगो को सद्भावना पूर्वक विचार करते हुये पूरा करे।

यह है माँगें

1 मजदूर विरोधी काली श्रम संहिताएं, किसान विरोधी तीन कृषि कानून और बिजली संशोधन अध्यादेश को रद्द करो।
2 स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सभी फसलों के लिए सी-2 (फसल की वास्तविक लागत अर्थात बीज, खाद, सिंचाई, बिजली, श्रम और कृषि जमीन का किराया)+50 प्रतिशत मुनाफा जोड़ उसके आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय कर उसकी खरीद की गारंटी सुनिश्चित करो।
3 पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस समेत आम उपयोग की वस्तुओं की मूल्यवृद्धि रोको और बढ़ाई गई कीमतों को वापस करो। कोरोना महामारी व लॉकडाउन के कारण हुई नौकरी से छंटनी और वेतन कटौती को वापस लो।
4 सभी प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का पंजीकरण करो। नए रोजगार पैदा करो, छंटनी, वेतन कटौती पर प्रतिबंध लगाओ। सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र में रिक्त पदों को तुरंत भरो।
5. कैजुअल, ठेका, असंगठित मजदूरों तथा योजना कर्मियों सहित सभी श्रेणी के मजदूरों को न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा पेंशन की गारंटी दो।
6. मनरेगा पर बजट आवंटन में वृद्धि कर 600 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी के साथ कम से कम 200 दिन काम सुनिश्चित करो। शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू करो। मनरेगा में काम एवं भुगतान पर जाति आधारित भेदभावपूर्ण सुझाव प्रस्ताव को वापस लो
7 सभी गैर-आयकरदाता परिवारों के बैंक खातों में प्रति माह 7500 रुपये भेजना सुनिश्चित करो।
8. महामारी के संकट के पूर्ण समाधान होने तक प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह प्रति व्यक्ति 10 किलो निःशुल्क अनाज उपलब्ध करो।
9. देश के सभी नागरिकों को तत्काल सार्वभौमिक निःशुल्क वैक्सीन लगाओ। फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दो। इसके लिए वैक्सीन उत्पादन में तेजी लाकर एक तयशुदा समय सीमा के भीतर सार्वभौमिक निःशुल्क वैक्सीन सुनिश्चित करने की नीति बनाओ और वितरण को सरकारी व्यवस्था के तहत लाओ। वर्तमान कारपोरेट समर्थक वैक्सीन नीति को रद्द करें। कोरोना में मारे गए नागरिकों के परिवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार मुआवजा दो।
10. सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6% स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित कर सभी स्तरों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को और मजबूत करो। बढ़ती कोविड महामारी से लड़ने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती सहित स्वास्थ्य ढाँचा, अस्पताल व उनमें पर्याप्त बिस्तर, ऑक्सीजन और अन्य चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करो। यह सुनिश्चित करो कि गैर-कोविड रोगियों को भी सरकारी अस्पतालों में प्रभावी उपचार मिले। सभी स्वास्थ्य और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और आशा व आंगनवाड़ी कर्मियों सहित महामारी प्रबंधन कार्य में लगे सभी के लिए बीमा कवरेज के साथ सुरक्षात्मक गियर, उपकरण आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करो।
11. सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी विभागों के निजीकरण और विनिवेश को रोकें। क्रूर आवश्यक प्रतिरक्षा सेवा अध्यादेश को वापस लो।

उक्त आशय की जानकारी संयुक्त ठेकेदारी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष कामरेड जुगुल किशोर राठौर ने जानकारी देते हुए बताया कि ज्ञापन सौपने के पूर्व आमसभा का आयोजन किया गया। आमसभा को एस एफ आई के प्रान्तीय अध्यक्ष कामरेड अजय तिवारी,ए आई के एस के प्रान्तीय अध्यक्ष कामरेड जनक राठौर, म प्र किसान सभा के जिला अध्यक्ष कामरेड रमेश सिंह, संयुक्त ठेकेदारी मजदूर यूनियन सीटू के महासचिव कामरेड सुग्रीव जयसवाल, कोषाध्यक्ष कामरेड सहसराम, सचिव कामरेड रमेश सिंह, कामरेड राजकुमार, आदि वक्ताओं ने संबोधित किया।

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