धान खरीदी केंद्र में अव्यवस्थाओं पर भड़के किसान, टोकन व्यवस्था और धान उठाव न होने से भारी परेशानी
तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

धान खरीदी केंद्र में अव्यवस्थाओं पर भड़के किसान, टोकन व्यवस्था और धान उठाव न होने से भारी परेशानी
(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)
जनकपुर (जिला एमसीबी), छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकासखंड की नगर पंचायत जनकपुर स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति धान खरीदी केंद्र में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिली। धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थाई समिति की सभापति श्रीमती सुखमंती सिंह, आम आदमी पार्टी के ब्लाक अध्यक्ष रज्जू सिंह तथा कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष रबी प्रताप सिंह द्वारा किया गया।
निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित किसानों ने अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष धान खरीदी से जुड़ी गंभीर समस्याएं खुलकर रखीं। किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि सभी किसानों की धान खरीदी की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। ऑनलाइन टोकन व्यवस्था में लिमिट पूरी होने का हवाला देकर छोटे किसानों के टोकन काटे नहीं जा रहे हैं, जिससे वे अपनी उपज बेचने से वंचित रह जा रहे हैं।
किसानों ने आरोप लगाया कि धान उठाव की प्रक्रिया समय पर न होने के कारण खरीदी केंद्रों में जगह की भारी कमी हो गई है।
जब किसान घर से ट्रैक्टर या बैलगाड़ी में धान लेकर केंद्र पहुंचते हैं, तो वहां पहले से जमा धान के कारण उन्हें घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। कई बार जगह न मिलने के कारण किसानों को वापस लौटना पड़ता है या लंबे समय तक इंतजार करना मजबूरी बन गया है।

किसानों का कहना है कि जब तक पहले आए किसानों की धान खरीदी होकर उठाव नहीं होता, तब तक नए किसानों को जगह नहीं मिलती।
निरीक्षण के दौरान जब इस विषय में समिति प्रबंधक से जानकारी ली गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि धान उठाव नहीं होने के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है, और इसके लिए उच्चाधिकारियों से लगातार मांग की जा रही है।
बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है।
किसानों ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीते तीन दिनों से बोरी सिलाई के लिए किसानों को अपनी जेब से सुतली खरीदनी पड़ रही है। न सिर्फ बोरी सिलाई, बल्कि तौल के बाद धान को लेबर के रूप में स्वयं किसान ही ढोकर टाल में रख रहे हैं।

जबकि शासन के नियमों के अनुसार तुलाई, सिलाई और ढुलाई की राशि सरकार द्वारा भुगतान की जाती है, फिर भी किसानों से जबरन यह काम कराया जा रहा है और उन्हें उसका कोई भुगतान नहीं मिल रहा है।
किसानों ने इसे सरकार और प्रशासन की मिलीभगत बताते हुए कहा कि यह सीधे-सीधे किसानों के अधिकारों का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन जानबूझकर किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर रहा है। किसानों का कहना है कि जब से प्रदेश में डबल इंजन की सरकार बनी है, तब से छोटे और मध्यम किसानों को सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों ने किसानों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए उच्च अधिकारियों तक मामला पहुंचाने और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे।




