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धान खरीदी लिमिट कम होने से किसान परेशान, गढ़वार केंद्र पर छोटे किसानों के साथ अन्याय

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

धान खरीदी लिमिट कम होने से किसान परेशान, गढ़वार केंद्र पर छोटे किसानों के साथ अन्याय

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

बड़े किसानों के टोकन से रोज पूरी हो रही लिमिट, छोटे किसान भटकने को मजबूर

भरतपुर (जिला एमसीबी)।
छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकासखंड में स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति गढ़वार के धान खरीदी केंद्र पर किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धान खरीदी की दैनिक लिमिट नहीं बढ़ाए जाने के कारण खासकर छोटे और सीमांत किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

गढ़वार धान खरीदी केंद्र में प्रतिदिन लगभग 890 क्विंटल धान खरीदी की लिमिट निर्धारित है। आरोप है कि इस पूरी लिमिट पर पहले ही बड़े किसानों के ऑनलाइन टोकन कट जा रहे हैं, जिससे लिमिट पूरी हो जाती है। नतीजतन छोटे-छोटे किसानों के टोकन ऑनलाइन सिस्टम में कट ही नहीं पा रहे, और उन्हें धान बेचने का मौका नहीं मिल रहा है।

कई किसान भाइयों ने बताया कि वे लगातार समिति के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। किसान सुबह से शाम तक केंद्र के बाहर इंतजार करते रहते हैं, फिर भी टोकन नहीं मिलने के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। किसानों का कहना है कि उनकी आवाज को न तो अधिकारी सुन रहे हैं और न ही कर्मचारी कोई ठोस समाधान बता रहे हैं।

समिति प्रबंधक का कहना है कि यदि धान खरीदी की लिमिट बढ़ा दी जाए, तो सभी किसानों का धान खरीदा जा सकता है और यह समस्या स्वतः समाप्त हो जाएगी। वर्तमान व्यवस्था में केवल बड़े किसानों को ही लाभ मिल रहा है, जबकि छोटे किसान पीछे छूट रहे हैं।

किसानों ने एक और गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया है कि जो टोकन अभी कट रहे हैं, उनकी खरीदी तिथि जनवरी माह की 28 और 29 तारीख दी जा रही है। इससे किसानों में नाराजगी और बढ़ गई है। किसान सरकार से जल्द से जल्द धान बेचने की अनुमति और प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग कर रहे हैं।

किसानों ने मांग की है कि जिला एमसीबी के सभी धान खरीदी केंद्रों की लिमिट बढ़ाई जाए, ताकि किसी भी किसान को धान बेचने से वंचित न रहना पड़े। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर हो सकते हैं।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और शासन इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देता है और किसानों को राहत कब मिलती है।

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