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कोटाडोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली उजागर: डॉक्टरों के अभाव में बंद पड़ा अस्पताल, सरकारी दवाइयों को जलाने-दफनाने के गंभीर आरोप

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

कोटाडोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली उजागर: डॉक्टरों के अभाव में बंद पड़ा अस्पताल, सरकारी दवाइयों को जलाने-दफनाने के गंभीर आरोप

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकासखंड की तहसील कोटाडोल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की दुर्दशा पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

वनांचल क्षेत्र में स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण ग्रामीणों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे क्षेत्र के गरीब, आदिवासी और दूरदराज़ गांवों में रहने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस गंभीर स्थिति को लेकर जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभा पति श्रीमती सुखमंती सिंह, लोकसभा अध्यक्ष रमाशंकर मिश्र तथा कुंवारपुर बालक अध्यक्ष रज्जू सिंह ने कोटाडोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान जब जनप्रतिनिधि और ग्रामीण अस्पताल पहुंचे, तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद पाया गया। बाद में उनके समक्ष अस्पताल का ताला खोला गया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकी।

निरीक्षण के दौरान यह भी आरोप सामने आए कि अस्पताल में उपलब्ध शासकीय दवाइयों का जनता में वितरण नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आसपास पड़ी सरकारी दवाइयों को न तो मरीजों को दिया जाता है और न ही समय पर उपयोग में लाया जाता है, बल्कि उन्हें आग लगाकर नष्ट कर दिया जाता है या गड्ढों में दफना दिया जाता है। बताया गया कि यह स्थान तहसील कार्यालय के समीप होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी आंखें मूंदे हुए बैठे हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा गरीब परिवारों के बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली जीवनरक्षक दवाइयों को जानबूझकर बर्बाद किया जा रहा है। डॉक्टरों के अभाव के कारण ये दवाइयां समय पर मरीजों तक नहीं पहुंच पातीं और एक्सपायरी डेट निकल जाने के बाद उन्हें नष्ट कर दिया जाता है, जिससे सरकारी संसाधनों की खुली बर्बादी हो रही है।

प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य मंत्री द्वारा प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन कोटाडोल जैसे वनांचल क्षेत्रों में जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण जनता को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुखमंती सिंह लगातार क्षेत्र का दौरा कर जनता की आवाज बन रही हैं और सरकार की कमियों को उजागर कर रही हैं। उन्होंने मांग की है कि कोटाडोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शीघ्र डॉक्टरों की पदस्थापना की जाए, दवाइयों के वितरण की जांच हो तथा दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को समय पर इलाज मिल सके।

ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार कर सरकार के दावों को जमीनी स्तर पर साकार किया जाए, ताकि वनांचल क्षेत्र के लोगों को भी सम्मानजनक और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।

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