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दीयों की तरह जगमगाते रहें आप,आपकी रोशनी से अनेकों घरों में उजाला है…”

तहसील विजयराघवगढ़ जिला कटनी मध्य प्रदेश

दीयों की तरह जगमगाते रहें आप,आपकी रोशनी से अनेकों घरों में उजाला है…”

(पढिए जिला कटनी ब्यूरो चीफ ज्योति तिवारी की खास खबर)

मध्य प्रदेश जिला कटनी विजयराघवगढ़ की धरती पर जन्मे विधायक संजय सत्येंद्र पाठक सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि सेवा संस्कार और सद्भावना का प्रतीक हैं।
जो व्यक्ति सत्ता से पहले संवेदना और पद से पहले परोपकार को महत्व देता है वही वास्तव में जन-सेवक कहलाने योग्य होता है और यही पहचान है संजय सत्येंद्र पाठक की। संस्कारों की शक्ति और सादगी का प्रतीक पिता श्री सत्येंद्र पाठक जी और माता श्रीमती निर्मला पाठक जी के संस्कारों ने जिस पुत्र को जन्म दिया वह आज हजारों परिवारों के लिए आशा की किरण बन चुके है।

सादगी भरा जीवन सहज व्यक्तित्व और हृदय में हर व्यक्ति के लिए स्थान यही वह गुण हैं जो उन्हें भीड़ से अलग करते हैं। लोगो का मानना है संजय पाठक भगवान तो नहीं पर जब अंधेरे वक्त में हाथ थामते हैं तो ईश्वर का ही रूप लगते हैं। कई गांवों में तो लोग उनके चित्र को मंदिरों में रखकर पूजा करते हैं। क्योंकि उन्होंने लोगों के जीवन में विकास और विश्वास का दीप जलाया है।

अब एक नजर विरोधियों की सच्चाई और सत्य का प्रकाश देखे

बीते दिनों कुछ लोग विरोध में आवाज़ उठाने लगे पर सच यह है कि जब कोई व्यक्ति बहुत ऊँचा उठता है तो छाया लंबी होना स्वाभाविक है।

संजय सत्येंद्र पाठक की लोकप्रियता ने सीमाएँ पार कर ली हैं।

प्रदेश ही नहीं, देश और विदेश तक उनका नाम सम्मान से लिया जाता है।उन्हें राजनीति का चाणक्य कहा जाता है। क्योंकि वे रणनीति नहीं जनसेवा की नींव पर राजनीति करते हैं।लेकिन अफ़सोस विरोध उन्हीं लोगों ने किया जो कभी उनके अपने थे…

जिन्हें उन्होंने सम्मान दिया संकट में सहारा दिया कंधे पर हाथ रखकर आगे बढ़ाया और वही लोग जब अपनी स्वार्थ की पूर्ति नहीं कर पाए,
तो आस्तीन के साँप बन गए।

भरोसा तोड़ा गया विश्वास के दीप पर कालिख पोती गई पर फिर भी संजय पाठक चुप रहे क्योंकि सच्चाई को प्रमाण की नहीं समय की गवाही की जरूरत होती है।

जनता का विश्वास अडिग है…
विजयराघवगढ़ की गलियों में आज भी बच्चों तक की जुबान पर सिर्फ एक नाम है

संजू भैया” हमारे अपने हमारे संरक्षक।गरीब की आँखों की चमक वृद्ध के चेहरे की मुस्कान और हर घर में जगमगाता दीप ये सब संजय सत्येंद्र पाठक के कार्यों की पहचान हैं। सच्चे नेता वो नहीं जो मंच पर बोलें सच्चे नेता वो हैं जो जनसेवा में डूबें।और ऐसे ही हैं संजय सत्येंद्र पाठक। झूठ के महल सच्चाई की आँधी में टिकते नहीं लोकप्रियता हमेशा। आलोचना को जन्म देती है

परंतु सच्चे जनसेवक की पहचान यही है कि वह अपनी कर्मनिष्ठा से विरोधियों की नकारात्मकता को भी पराजित कर देता है।

विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के यशस्वी विधायक संजय सत्येंद्र पाठक पर लगाए जा रहे झूठे और मनगढ़ंत आरोप उन्हीं लोगों की रचना हैं जो जनता के बीच अपना स्थान खो चुके हैं।

इन विरोधियों की स्थिति वैसी ही है। दीये की लौ से जलने वाले पतंगों की या सूर्य की चमक से ईर्ष्या करने वाली परछाईओ की तरह। संजय सत्येंद्र पाठक का कार्यशैली और जनसेवा का समर्पण ही उनका सबसे बड़ा परिचय है।जो लोग झूठ के जाल बुन रहे हैं वे भूल रहे हैं कि सत्य की तपिश में झूठ के धागे स्वयं पिघल जाते हैं।

राजनीति में जब विकास की किरण फैलती है तो अंधकार के पक्षधर बेचैन हो उठते हैं। वही बेचैनी आज विरोधियों के शब्दों में दिख रही है।

लेकिन जनता सब जानती है जिसने गाँव-गाँव रोशनी बाँटी उस दीपक को धुआँ नहीं ढक सकता।

झूठ के सिक्के बाज़ार में चलते नहीं,सच्चाई के सामने झूठ टिकते नहीं।जो ख़ुद अंधेरे में डूबे हैं, वो क्या रोशनी बाँटेंगे,पाठक जी के उजाले से जलकर बस राख हो जाएंगे।नाम बदनाम करने चले थे कुछ लोग,
मगर जनता ने कर दिया उन्हें ही बेनक़ाब।

जिनके दिल में है सेवा, वो मुक़द्दर लिखते हैं,अफ़वाहें उड़ाने वाले बस किस्से गढ़ते हैं।वक्त गवाह है, सच्चाई कभी झुकती नहीं, झूठ चाहे जितना ऊँचा उड़ ले पर टिकती नहीं।

संजय सत्येंद्र पाठक के लिए यह आरोप कोई चुनौती नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने विकास और लोकप्रियता की ऐसी मिसाल रखी है, जहाँ पहुँच पाना विरोधियों के लिए स्वप्न समान है।जो जनता के दिलों में बस जाए, उसे अफ़वाहें नहीं हटा सकतीं।

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