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विराट हॉस्पिस कैंसर मरीजों का जीवन अंतिम समय में देखभाल कर मानवता की सेवा को दिया नया आयाम

जिला जबलपुर मध्य प्रदेश

विराट हॉस्पिस कैंसर मरीजों का जीवन अंतिम समय में देखभाल कर मानवता की सेवा को दिया नया आयाम

(पढिए राजधानी एक्सप्रेस न्यूज़ हलचल आज की सच्ची खबरें)

मध्य प्रदेश जिला जबलपुर में साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने की थी वर्ष 2013 में स्थापना.
अब तक कैंसर के छब्बीस सौ मरीजों की हो चुकी है सेवा.
गरीब परिवारों के कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिये कैंसर अस्पताल भी बनेगा.
ब्रेकी थेरेपी मशीन से शुरू हुआ उपचार.
स्वावलंबी_महिला_सशक्त_राष्ट्र

जबलपुर के समीप भेडाघाट मार्ग पर स्थित विराट हॉस्पिस किसी परिचय का मोहताज नहीं है।

कैंसर से जंग हार चुके मरीजों की जीवन के अंतिम पड़ाव पर निःस्वार्थ भाव से देखभाल करने के इस प्रकल्प की स्थापना महिला संत साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने वर्ष 2013 में की थी।

मानवता और समाज की सेवा के मजबूत इरादों के साथ ज्ञानेश्वरी दीदी द्वारा छोटे स्वरूप में प्रारंभ किया गया

यह संस्थान आज बड़ा आकार ले चुका है और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान भी स्थापित कर चुका है।

कैंसर मरीजों की जीवन के अंतिम समय में विराट हॉस्पिस में की जा रही देखभाल की ऐसे ही तारीफ नहीं की जाती, बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान यहां भेजा जाना इसका प्रमाण है।

विराट हॉस्पिस में रहने वाले कैंसर मरीज जानते हैं कि किसी भी समय उनकी साँसों की डोर टूट सकती है

लेकिन इसके बावजूद उनके चेहरे पर यहां सेवाभाव से की जा रही देखभाल को लेकर संतोष देखा जा सकता है। QA

ज्ञानेश्वरी दीदी ने बताया कि शुरूआत में लगता था कि ऐसे कैंसर मरीजों की देखभाल कैसे की जा सकेगी

जिनके बचने की कोई उम्मीद नहीं है, डॉक्टर भी जबाब दे चुके हैं और परिवार भी उनका साथ छोड़ चुका है।

लेकिन लोगों, दानदाताओं और कॉरपोरेट कंपनियों के सहयोग से धीरे-धीरे सारी व्यवस्थाएं होती गई और पिछले करीब बारह वर्षों में ढाई हजार से अधिक कैंसर मरीजों की सेवा की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि विराट हॉस्पिस में कैंसर मरीजों को चाय, दूध, नास्ता और दोनों समय का भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

मरीज के परिवार के एक सदस्य को भी यहॉं रहने की अनुमति है। उसके भोजन आदि की व्यवस्था भी हॉस्पिस की ओर से की जाती है।

भोजन पौष्टिक हो इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। भोजन पकाने में बायो गैस का इस्तेमाल किया जाता है।

परिसर में उगाई गई आर्गेनिक सब्जियां ही भोजन में परोसी जाती हैं। परिसर स्थित गौशाला की गायों का दूध मरीजों को दिया जाता है।

साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने बताया कि करीब सवा तीन एकड़ में फैले विराट हॉस्पिस का पूरा परिसर इको फ्रेंडली है। यहाँ सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं।

हॉस्पिस परिसर से निकला प्रदूषित पानी माँ नर्मदा में न मिले इसके लिये यहाँ दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाये गये हैं।

इनसे साफ किया गया पानी परिसर में लगे पेड़-पौधों की सिंचाई और निस्तार में इस्तेमाल किया जाता है।

अब उपचारात्मक सुविधाएं देने की तैयारी, बनेगा कैंसर अस्पताल
कैंसर से जंग हार चुके मरीजों की जीवन के अंतिम समय में देखभाल करने वाले विराट हॉस्पिस परिसर में अब कैंसर के नये मरीजों को उपचारात्मक सेवाएं देने 75 बिस्तरों का तीन मंजिला अस्पताल भी बनाया जा रहा है।

विराट हॉस्पिस के मेडिकल डायरेक्टर डॉ अखिलेश गुमास्ता ने बताया कि अस्पताल का भूतल बनकर तैयार हो चुका है।

दान दाताओं और कार्पोरेट्स के सहयोग से यहाँ ब्रेकी थेरेपी जैसी अत्याधुनिक मशीन लगाई गई है। इससे कैंसर मरीजों का उपचार शुरू भी कर दिया गया है।

भाभा एटमिक रिसर्च सेंटर से अनुमति मिलते ही यहाँ स्थापित कोबाल्ट मशीन से भी कैंसर मरीजों की रेडियो थेरेपी शुरू कर दी जाएगी।

सर्जरी की जरूरत वाले कैंसर मरीजों के लिये इस नये भवन में सर्जिकल वार्ड भी बनाया जा रहा है।

विराट हॉस्पिस की संस्थापक ज्ञानेश्वरी दीदी मूल रूप से हरियाणा के पिंजौर की रहने वाली हैं।

अपने गुरु ब्रह्मर्षि विश्वात्मा बावराजी महाराज से दीक्षा लेने के बाद साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने समाजसेवा के लिए अलग-अलग शहरों में भ्रमण किया।

नर्मदा नदी के किनारे बसा जबलपुर शहर पसंद आया और इसे ही उन्होंने अपना कर्मक्षेत्र बना लिया। साध्‍वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने बताया कि उनकी इच्छा एक ऐसा परिसर बनाने की थी

जहां जीवन के अंतिम समय में कैंसर मरीजों को पारिवारिक माहौल में रखकर इलाज और सेवा की जा सके।

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