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मोटे अनाज श्रीअन्न और प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा वैज्ञानिक सलाहकार समिति से वर्ष 2024 की कार्ययोजना हेतु लिये सुझाव

सतना जिला मध्य प्रदेश

मोटे अनाज श्रीअन्न और प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा वैज्ञानिक सलाहकार समिति से वर्ष 2024 की कार्ययोजना हेतु लिये सुझाव

(पढिए राजधानी एक्सप्रेस न्यूज़ हलचल आज की सच्ची खबरें)

मध्य प्रदेश जिला सतना में 9 फरवरी 2024/दीनदयाल शोध संस्थान के कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां द्वारा आगामी वर्ष की कार्य योजना में मोटे अनाज (श्री अन्न) के उत्पादन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना केंद्रित विषय के रूप में शामिल किया जायेगा।

शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा के मुख्यातिथ्य और संगठन सचिव श्री अभय महाजन की अध्यक्षता में संपन्न वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में समिति के सदस्यों से वर्ष 2024 की गतिविधियों की कार्य योजना के लिए सुझाव लिये गये।

इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री रामखेलावन कोल, महापौर श्री योगेश ताम्रकार, चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ भरत मिश्रा, सीईओ जिला पंचायत डॉ परीक्षित झाड़े, केंद्र के संचालक एमएस नेगी, जवाहरलाल कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक, चित्रकूट विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, रीवा, कटनी, सतना के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं सदस्य प्रगतिशील कृषक भी उपस्थित थे।

कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री कोल ने कहा कि खेती को लाभकारी धंधा बनाने और आय दुगुनी करने कृषि वैज्ञानिक अनुपयोगी रिक्त भूमि पर फसल लगाने की तकनीक और प्रेरणा दें।

उन्होंने कहा कि मझगवां और परसमनिया के दूरस्थ पहाड़ी अंचल पर मोटे अनाज की खेती के प्रचलन को बढ़ावा देकर इन क्षेत्रों से कुपोषण दूर किया जा सकता है।

महापौर योगेश ताम्रकार ने कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता मोटे अनाज (मिलेट्स) को प्रमोट करने की है

प्रोडक्शन, प्रमोशन और प्रोसेसिंग तथा मार्केटिंग की सुविधा देकर इनका विस्तार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संसद और जी-20 के खान-पान में मिलेट को शामिल कर उदाहरण प्रस्तुत किया

वहीं सतना जिले के कृषक पद्मश्री बाबूलाल दहिया और रामलोटन कुशवाहा को पूरे देश में ख्याति मिली।

महापौर ने कृषि से जुड़े सभी कार्यक्रमों में मिलेट के प्रदर्शन और विक्रय के लिए एक सेल काउंटर जरूर स्थापित करने की सलाह दी।

कलेक्टर अनुराग वर्मा ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों में हर क्षेत्र में हो रहे उन्नत कार्यों की झलक मिलती है।

यहां कृषि की पद्धतियों में सुधार लाने और कृषि की मैदानी स्तर की कठिनाइयों से निजात दिलाने एक्सपर्ट कृषि वैज्ञानिक है।

जो किसानों को गंभीरता से मार्गदर्शन करते हैं।

उन्होंने कहा कि 10-15 वर्ष पहले गेहूं और धान के परंपरागत फसल के रकबे को बढ़ाने की बात होती थी।

आज वर्तमान की आवश्यकता अनुसार परंपरागत फसलों के रकबे को कम कर मोटे अनाज, दलहन, तिलहन के क्षेत्र विस्तार का काम हो रहा है।

सबसे ज्यादा दालों की खपत और उत्पादन भारत में होता है।

राज्य शासन मध्यप्रदेश के 13 जिलों में अरहर की खरीदी कर रही है।

जिसमें सतना जिला भी शामिल है। उन्होंने सतना जिले में अरहर की खेती और उत्पादन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र कृषक समुदाय को नवीन एवं उन्नत तकनीकों से संसाधन आधारित टिकाऊ और लाभकारी खेती के लिये तकनीकी सहायता और सेवायें दे रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की 14वीं पुण्यतिथि पर 25 से 27 फरवरी को कृषि के विविध विषयों पर संगोष्ठियां होंगी।

जिनमें देश-देशांतर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक किसानों का मार्गदर्शन करेंगे।

उन्होंने कहा कि एक कागज बनाने में कई पेड़ काटे जाते हैं। पर्यावरण संतुलन के लिए संपूर्ण कामकाज को पेपरलेस बनाया जाएगा।

इसी प्रकार मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक भोज के अवसरों पर थर्मोंकोल और प्लास्टिक के बने बर्तनों का बहिष्कार किया जायेगा।

चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो डॉ भरत मिश्रा ने कहा कि गांवों की उन्नति प्रत्यक्ष रूप से खेती से जुड़ी होती है।

वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सुझावों को विश्वविद्यालय की कृषि संकाय में भी आत्मसात किया जाएगा।

इसके पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एमएस नेगी ने विगत बैठक के सुझावों पर अमल और धनात्मक फीडबैक केंद्र की विगत वर्ष की गतिविधियों का प्रतिवेदन, प्रक्षेत्र की प्रस्तावित गतिविधियों, केंद्र की प्रस्तावित वर्ष 2024 की कार्य योजना का पावर प्रेजेंटेशन प्रस्तुतिकरण किया।

उन्होंने बताया कि आगामी कार्य योजना में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने प्रत्येक ब्लॉक में 5-5 कृषक दूत बनकर प्रशिक्षित किया जायेगा।

लगभग 5 हजार किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र का भ्रमण कराकर प्राकृतिक खेती का प्रदर्शन दिखाया जायेगा।

मिलेट्स और प्राकृतिक खेती का 5 एकड़ क्षेत्र में प्रदर्शन होगा। क्षेत्र के युवाओं को आगरा से प्रशिक्षक बुलाकर पेठा बनाने का प्रशिक्षण दिलाया जायेगा।

राष्ट्रऋषि नानाजी की पुण्यतिथि पर तीन दिवसीय कार्यक्रम में 15 किसानों को उत्कृष्ट कृषक सम्मान से विभूषित किया जायेगा।

इनमें तीन महिला सशक्तिकरण सम्मान और दो महिला स्वावलंबन सम्मान शामिल है। क्षेत्र में 21 वन धन केंद्र की स्थापना की जाएगी।

समिति की बैठक में जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने केंद्र की योजना, फसल विविधीकरण पर कृषि विज्ञान केंद्र की योजना, जिले में पोषक अनाजों की खेती को बढ़ावा देकर कुपोषण कम करने की योजना, प्रधानमंत्री वन धन योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा की गई।

बैठक में समिति के सदस्य एसपी त्रिपाठी, साधना तिवारी, प्रणवीर सिंह, अधिष्ठाता प्रोफेसर डीपी राय, उपसंचालक कृषि मनोज कश्यप, परियोजना अधिकारी आत्मा राजेश त्रिपाठी, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक, अटारी जबलपुर के निदेशक एसआरके सिंह, उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ प्रमोद शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास सौरभ सिंह ने भी कार्य योजना के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

 

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