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*रेलवे बिलासपुर जोन की तानाशाही से जनता परेशान नहीं मिल रहा ट्रेनों का स्टापेज*

जिला बिलासपुर मध्य प्रदेश

महज मेमो ट्रेन के सहारे नगर की जनता

रेलवे बिलासपुर जोन की तानाशाही से जनता परेशान नहीं मिल रहा ट्रेनों का स्टापेज

रिपोर्टर – मध्य प्रदेश हेड के साथ विकास सिंह राठौर

वेंकटनगर/भारतीय रेलवे के बिलासपुर जोन की मनमानी से जनता काफी परेशान हो रही है। करोना काल के बाद रेलवे बिलासपुर जोन द्वारा आधा दर्जन ट्रेनों का स्टापेज बंद कर दिया गया था। जिसके बाद आज दिनांक तक ट्रेनों का परिचालन व्यवस्थित रूप से शुरू नहीं किया गया है। प्राप्त जानकारी अनुसार बिलासपुर से रीवा तक चलने वाली बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस, नर्मदा एक्सप्रेस बिलासपुर-इंदौर, बिलासपुर-भोपाल, बिलासपुर-चिरमिरी ट्रेन को करोना के दौरान बंद कर दिया गया था जिसका परिचालक आज दिनांक तक नहीं शुरू किया गया है जिसे आम जनमानस पूर्व की तरह परिचालन को लेकर मांग तेज हो गई है। ट्रेनों के स्टापेज न होने के कारण आम जनमानस को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई के बोझ तले दबे आम जनता अब बिलासपुर जोन रेलवे की तानाशाही रवैया से काफी परेशान हो चुकी है।

कोरोना काल से नही रूकी यात्री ट्रेन

कोरोना का सकट किसी प्राकृतिक आपदा से कम नही था, लेकिन जनता ने उस आपदा से निपटने सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग किया। उस दौरान व्यक्ति से की सोच को व्यक्ति को दूर रहने की लेकर समस्त आवागमन रोकने के साथ ही यात्री ट्रेने बंद कर दी गई थी उसके बाद स्थिति सामान्य होने पर विभिन्न रेलवे स्टेशनों में यात्री ट्रेनों की सुविधाएं प्रारंभ हो गयी और हालही में 6 मार्च से लगभग सभी रेलवे स्टेशनों पर यात्री ट्रेनों के स्टापेज बहाल किये गये, लेकिन वेंकटनगर एक ऐसा अछूता रेलवे स्टेपन दिखाई दे रहा है जहां यात्री टेनो के स्टापेज नहीं किये गये। जबकि यह सब कुछ केन्द्र सरकार के मानस पटल में रखने की जिम्मेदारी मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट याने देश के सर्वोच्च सदन के लिये शहडोल लोकसभा से निर्वाचित सदस्य सांसद हिमादी सिंह का नैतिक दायित्व था जिसके निर्वहन में उनका रवैया उदासीन दिखाई पड़ा।

बंद पड़ी ट्रेनों को शुरू करने की मांग

बिलासपुर-रीवा, बिलासपुर-इंदौर, बिलासपुर-भोपाल, बिलासपुर-चिरमिरी चलने वाली ट्रेन करोना काल के समय से बंद कर दी गई थी जिसका परिचालन शुरू तो हो गया है लेकिन वेंकटनगर में स्टापेज अब तक शुरू नहीं किया गया है। उक्त ट्रेनों पर यात्री यात्रा किया करते थे जो कि उक्त ट्रेनों के माध्यम से आस-पास क्षेत्र में बाजार हाट और सामान खरीदी बिक्री का कार्य करते थे वहीं अधिकांश लोग उक्त ट्रेनों के माध्यम से अपने कामकाज में समय से पहुंच जाया करते थे लेकिन गाड़ियों का स्टॉपेज नहीं होने से जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

महज मेमो ट्रेन का मिला सहारा

कोरोना काल के बाद दो मेमो ट्रेनों का स्टापेज वेंकटनगर दिया गया जिससे बिलासपुर-कटनी एवं बिलासपुर-शहडोल रेल्वे ट्रैक पर एकमात्र सहारा जो वेंकटनगर को दिया गया है। कटनी से चलकर बिलासपुर को जाने वाली मेमो ट्रेन आएदिन विलंब रहती है, जिसके कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड रहा है।

रेलवे की मनमानी से जनता की जेब भारी

भारतीय रेलवे प्रशासन बिलासपुर जोन की मनमानी से जनता के जेब में अतिरिक्त भार पड़ रहा है। करोना काल के समय सरकार द्वारा स्पेशल ट्रेनों के नाम पर यात्रा शुल्क में बढ़ोतरी की गई थी। जो कि अब तक स्थाई रखी गई है वेंकटनगर से अनूपपुर का यात्रा शुल्क रेलवे में करोना के पहले 10 रुपये हुआ करता था, जो कि अब बढ़कर 30 रुपये हो गया है उक्त तरीके से रेलवे प्रशासन द्वारा की गई।

मनमानी के कारण आम जनमानस के जेब में तीन गुना अतिरिक्त भार पड़ रहा है, जिससे रेलवे से आने वाले सामान भी महंगे दर्पण क्षेत्रों में दिए जा रहे हैं। ट्रेन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली सब्जी-भाजी भी अब महंगी हो चली है जिससे घर का बजट भी बिगड़ रहा है। रेलवे प्रशासन की मनमानी ने आम जनमानस के बजट को बिगाड़ कर रख दिया है देखना यह है कि कब तक रेलवे प्रशासन की मनमानी का दंश आम जनमानस पर भारी पड़ेगा।

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