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*युवा देश का भविष्य, विवेकानंद जी के आचरण को अपनाएं – उपाध्यक्ष जन अभियान परिषद*

शहडोल जिला मध्यप्रदेश

संशोधित समाचार
युवा देश का भविष्य, विवेकानंद जी के आचरण को अपनाएं – उपाध्यक्ष जन अभियान परिषद

उठो जागो और लक्ष्य प्राप्त करो – डॉ जितेंद्र जामदार

विवेकानंद जयंती अंतर्गत युवा संवाद व्याख्यान कार्यक्रम हुआ आयोजित

रिपोर्टर – सी.एस. राठौर (संभागीय ब्यूरो चीफ)

शहडोल/4 मार्च 2023/

विवेकानंद जयंती अंतर्गत युवा संवाद व्याख्यान कार्यक्रम दिन शनिवार को जिला मुख्यालय के मानस भवन में आयोजित किया गया। व्याख्यान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपाध्यक्ष, (राज्य मंत्री दर्जा) मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग डॉ जितेंद्र जामदार ने कहा कि युवा पीढ़ी देश का भविष्य है उन्हें स्वामी विवेकानंद जी के दिखाए गए मार्गो पर चलना चाहिए और हमे जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो तब तक कड़ी मेहनत से प्रयास करना चाहिए। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के बारे में बताते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी सन्‌ 1863 को हुआ। उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेंद्र को भी अंगरेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढंग पर ही चलाना चाहते थे।

नरेंद्र की बुद्धि बचपन से बड़ी तीव्र थी और परमात्मा को पाने की लालसा भी प्रबल थी। इस हेतु वे पहले ब्रह्म समाज में गए किंतु वहां उनके चित्त को संतोष नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सन्‌ 1884 में विश्वनाथ दत्त की मृत्यु हो गई। घर का भार नरेंद्र पर पड़ा। घर की दशा बहुत खराब थी। कुशल यही थी कि नरेंद्र का विवाह नहीं हुआ था। अत्यंत गरीबी में भी नरेंद्र बड़े अतिथि-सेवी थे।

स्वयं भूखे रहकर अतिथि को भोजन कराते, स्वयं बाहर वर्षा में रातभर भीगते-ठिठुरते पड़े रहते और अतिथि को अपने बिस्तर पर सुला देते। रामकृष्ण परमहंस की प्रशंसा सुनकर नरेंद्र उनके पास पहले तो तर्क करने के विचार से ही गए थे किंतु परमहंस जी ने देखते ही पहचान लिया कि ये तो वही शिष्य है जिसका उन्हें कई दिनों से इंतजार है।

परमहंस जी की कृपा से इनको आत्म-साक्षात्कार हुआ फलस्वरूप नरेंद्र परमहंस के शिष्यों में प्रमुख हो गए। संन्यास लेने के बाद इनका नाम विवेकानंद हुआ। समाजसेवी कमल प्रताप सिंह ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी स्वामी विवेकानंद के विचारों को ग्रहण करें और आगे बढ़े। संभागीय समन्वयक जन अभियान परिषद प्रवीण पाठक ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा’ यह स्वामी विवेकानंदजी का दृढ़ विश्वास था। अमेरिका में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की अनेक शाखाएं स्थापित कीं। अनेक अमेरिकन विद्वानों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया। वे सदा अपने को गरीबों का सेवक कहते थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला समन्वयक श्री विवेक पांडे ने कहा कि

25 वर्ष की अवस्था में नरेंद्र दत्त ने गेरुआ वस्त्र पहन लिए। तत्पश्चात उन्होंने पैदल ही पूरे भारतवर्ष की यात्रा की। सन्‌ 1893 में शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म परिषद् हो रही थी। स्वामी विवेकानंदजी उसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप से पहुंचे। योरप-अमेरिका के लोग उस समय पराधीन भारतवासियों को बहुत हीन दृष्टि से देखते थे। वहां लोगों ने बहुत प्रयत्न किया कि स्वामी विवेकानंद को सर्वधर्म परिषद् में बोलने का समय ही न मिले। एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें थोड़ा समय मिला किंतु उनके विचार सुनकर सभी विद्वान चकित हो गए। इसी प्रकार कार्यक्रम को समाजसेवी सूर्यकांत मिश्रा सहित अन्य लोगों ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर संभागीय समन्वयक प्रवीण पाठक, मुख्य नगरपालिका अधिकारी अमित तिवारी, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग आनंद राय सिन्हा, समाजसेवी राजेश्वर उदानिया, कल्याणी बाजपेई, दिनेश दीक्षित, ब्लॉक समन्वयक सोहागपुर प्रिया सिंह बघेल, बुढार आशीष मुखर्जी, जयसिंह नगर रितिक दास, आलोक सोंधिया,अनामिका मिश्रा, रूपाली, ओमजी मिश्रा, के.पी. महिंद्रा, सहित नवांकुर संस्था,प्रस्फुटन समिति के सदस्य गण सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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