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*जिला में बच्चों के पुनर्वास की नीति क्रियान्वयन हेतु समिति की गई गठित*

सतना जिला मध्यप्रदेश

*जिला में बच्चों के पुनर्वास की नीति क्रियान्वयन हेतु समिति की गई गठित*

(पढ़िए जिला सतना क्राइम ब्यूरो चीफ दीपक तोमर की रिपोर्ट)

मध्य प्रदेश जिला सतना में 19 अगस्त 2022 को माननीय उच्चतम न्यायालय में प्रचलित याचिका में दिये गये निर्देशों के पालन में राज्य शासन द्वारा भिक्षावृत्ति करने, कूड़ा, पन्नी बीनने, श्रम करने, गरीबी और अन्य विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों के कारण सड़क पर रहने वाले बच्चों के परिवार सुदृढ़ीकरण हेतु विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित कर परिवार के पुनर्व्यवस्थापन के लिये सड़क पर रहने वाले बच्चों के पुनर्वास नीति 2022 का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

कलेक्टर अनुराग वर्मा ने बच्चों के पुनर्वास नीति 2022 के क्रियान्वयन के लिये कलेक्टर सतना की अध्यक्षता में जिला समिति गठित की है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी सतना समिति में सदस्य सचिव होंगे।

जिला समिति में पुलिस अधीक्षक, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, आयुक्त नगर पालिक निगम, परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण, प्रभारी अधिकारी यातायात पुलिस, प्रभारी अधिकारी विशेष पुलिस इकाई, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, उप संचालक सामाजिक न्याय, सहायक श्रमायुक्त, जिला विधिक सहायता अधिकारी, जिला संयोजक आदिम जाति, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी, जिला जनसंपर्क अधिकारी को सदस्य बनाया गया है।
*लक्षित समूह*

सड़क पर रहने वाले बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उनका सर्वांगीण विकास करने के उद्देश्य से लागू नीति के तहत लक्ष्य समूह में बिना सहयोग के पूर्णतः अकेले रहने वाले बच्चे, ऐसे बच्चे जो दिन में सड़क पर और रात्रि में में अपने परिवार के साथ रहते हैं। uपरिवार के साथ सड़क पर रहने वाले बच्चे, प्रवासी परिवार के बच्चे, परित्यक्त बच्चे, दिव्यांग बच्चे, निराश्रित बच्चे, बाल श्रमिक, कामकाजी बच्चे, बाल भिक्षुक, कामकाजी या कचरा बीनने वाले बच्चे भी दायरे में शामिल रहेंगे।

ऐसे बच्चों का सर्वे, चिन्हांकन, मैपिंग, रेस्क्यू कर अभिलेखीकरण किया जायेगा। इसके बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर बच्चों को संरक्षण एवं बाल देखरेख योजना का लाभ दिया जायेगा।
महिला बाल विकास, गृह विभाग, सामाजिक न्याय, स्कूल शिक्षा, नगरीय प्रशासन, राजस्व, अनुसूचित जाति-जनजाति, श्रम, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण, तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, जनसंपर्क विभाग, खाद्य आपूर्ति, ग्रामीण विकास आदि विभागों के सहयोग और योजनाओं से ऐसे बच्चों को पोषित कर पुनर्वासित किया जायेगा और उनके परिवारों का आर्थिक सुदृढ़ीकरण किया जायेगा।

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