*कलेक्टर ने देवराज सिंह को छः माह तक थाना प्रभारी के सामने हाजिरी देने का आदेश दिया*
अनुपपुर जिला मध्य प्रदेश

देवराज सिंह को छः माह तक होना होगा थाना प्रभारी के सामने हाजिर
कलेक्टर ने देवराज सिंह को छः माह तक थाना प्रभारी के सामने हाजिरी देने का आदेश दिया
संवाददाता – चंद्रभान सिंह राठौर संभागीय ब्यूरो चीफ
अनूपपुर
कलेक्टर एवं जिला दण्डांधिकारी सोनिया मीना ने अनावेदक देवराज सिंह पिता सतीश सिंह उम्र 28 वर्ष निवासी बस स्टैण्ड के पास वेंकटनगर थाना जैतहरी जिला अनूपपुर जो 2010 से 2020 तक लगातार 08 अपराधिक गतिविधियों में संलग्न पाया गया है को आगामी 6 माह तक की कालावधि तक प्रत्येक मंगलवार के 12 बजे दिन थाना प्रभारी जैतहरी, जिला अनूपपुर (म.प्र.) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हाजिरी दर्ज कराने का आदेश दिया है।
आपने अनावेदक को आदेश दिया है कि वह अपने आपराधिक कृत्यों को पूर्णतः त्याग दे, अन्यथा एक भी आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की दशा में उसके विरुद्ध जिला बदर का प्रकरण पुनः प्रांरभ किया जाकर समुचित कार्यवाही की जा सकेगी। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि उपरोक्त आदेश का पालन न करने, उल्लंघन करने या विरोध करने पर, म.प्र. राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 14 के अंतर्गत अनावेदक को गिरफ्तार किया जावेगा जो 03 वर्ष के कारावास व जुर्माने से दण्डनीय होगा।
प्रकरण का विवरण इस प्रकार है कि पुलिस अधीक्षक अनूपपुर के प्रतिवेदन में कहा गया है कि, अनावेदक वर्ष 2010 से लगातार अवैध कारोबार एवं आपराधिक गतिविधियों में संगठित गिरोह बनाकर संलिप्त है, अनावेदक आए दिन मारपीट, लूट, गुण्डागर्दी कर धमकाकर लोगों में आतंक पैदा किए हुए है, अनावेदक के विरुद्ध लगातार प्रतिबंधात्मक कार्यवाही से प्रतिबंधित किया गया, किन्तु अनावेदक के आचरण में कोई सुधार नहीं आ रहा है, अनावेदक अपने साथियों के साथ मिलकर मारपीट, लूट, गुण्डागर्दी की घटना घटित कर रहा है। अनावेदक आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होकर पुलिस अधिकारी एवं अन्य विभाग के कर्मचारियों के विरुद्ध अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर झूठी शिकायत कर परेशान कर आतंक पैदा करने का प्रयास करता है।
अनावेदक के आतंक से आम जनता काफी भयभीत होकर इसके विरुद्ध थाने में रिपोर्ट करने व गवाही देने से घबराती है, अनावेदक अन्तर्जिला अपराधी है और अनावेदक के स्वछंद रहने पर जनता अपने आप को असुरक्षित महसूस करती है। अनावेदक के आपराधिक गतिविधियों पर सुधार लाने हेतु प्रतिबंधित कार्यवाहियां भी की गई, किन्तु अनावेदक पर कोई सुधारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है।




