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घटाई पंचायत में सचिव की मनमानी चरम पर, शासकीय राशि के दुरुपयोग के गंभीर आरोप

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

घटाई पंचायत में सचिव की मनमानी चरम पर, शासकीय राशि के दुरुपयोग के गंभीर आरोप

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

उप-हेडिंग
पंचों की अनुमति व जानकारी के बिना निकाली गई सरकारी राशि, बार-बार स्थानांतरण के बावजूद पुनः पदस्थापना — उच्च अधिकारियों के संरक्षण का आरोप

छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत घटाई में पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामवासियों एवं पंचायत के निर्वाचित पंचों ने सचिव पर शासकीय धन के दुरुपयोग, मनमानी ढंग से राशि आहरण तथा पंचायत के नियम-कायदों की खुली अवहेलना करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा संबंधित विभागीय अधिकारियों से कई बार शिकायत भी की जा चुकी है, किंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव द्वारा पंचों की अनुमति एवं जानकारी के बिना ही शासकीय योजनाओं की राशि निकाल ली जाती है।

पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पारित किए बिना, पंचों को विश्वास में लिए बिना बैंक से रकम आहरण करना पंचायत राज अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। इसके बावजूद सचिव द्वारा लगातार इसी प्रकार की कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है, जिससे पंचायत में असंतोष और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि सचिव का पूर्व में स्थानांतरण तो किया गया, लेकिन महज चार दिन के भीतर पुनः उसी पंचायत में वापस आकर ज्वाइन कर लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी ठोस कारण के इतनी जल्दी पुनः पदस्थापना यह संकेत देती है कि सचिव को किसी बड़े अधिकारी अथवा प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है।

ग्रामीणों के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब सचिव पर ऐसे आरोप लगे हों। इससे पूर्व ग्राम पंचायत जमथन में भी सचिव एवं सरपंच पर शासकीय राशि के दुरुपयोग के आरोप लग चुके हैं। जहां-जहां भी सचिव को प्रभार मिला है, वहां-वहां सरपंच के साथ मिलकर सरकारी धन के गलत इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं। बावजूद इसके, अब तक न तो विभागीय जांच को अंजाम तक पहुंचाया गया और न ही दोषियों पर कोई कठोर कार्रवाई की गई।

ग्रामवासियों का यह भी कहना है कि सरकार एक ओर भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर दोषियों को संरक्षण मिलना आम जनता के विश्वास को तोड़ रहा है। भरतपुर विकासखंड की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। क्या स्थानीय नेताओं और अधिकारियों का संरक्षण ऐसे मामलों में बाधा बन रहा है?

नव-नियुक्त पदाधिकारियों के ज्वाइन करने के साथ ही पंचायत में यह चर्चा आम हो गई है कि क्या सरकार वास्तव में जनता के अधिकारों की रक्षा कर रही है या फिर व्यवस्था के नाम पर उनका शोषण किया जा रहा है।

ग्रामवासियों ने मांग की है कि इन सभी आरोपों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लगाए गए आरोप सही हैं या गलत। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर उदाहरण प्रस्तुत किया जाए।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन जनता की आवाज को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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