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घटाई पंचायत में सचिव की मनमानी से जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण आक्रोशित

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

घटाई पंचायत में सचिव की मनमानी से जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण आक्रोशित

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

ट्रांसफर के बावजूद पुनः जॉइनिंग, पूर्व पंचायत में भी शासकीय राशि के दुरुपयोग के आरोप

छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत भरतपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत घटाई में सचिव के मनमाने रवैये को लेकर जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्राम पंचायत घटाई में सचिव पद पर कार्यरत इंद्रपाल यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों व पंचों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अभाव में पंचायत संचालन, जनप्रतिनिधि परेशान

ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि सचिव द्वारा पंचायत से जुड़ी किसी भी प्रकार की स्पष्ट जानकारी जनप्रतिनिधियों को नहीं दी जाती, जिससे पंचायत कार्यों के संचालन में लगातार समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसी कारण जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर सचिव के ट्रांसफर की मांग की थी, जिसके बाद उनका स्थानांतरण किया गया।

ट्रांसफर के बाद भी पुनः पंचायत में वापसी पर सवाल

आरोप है कि ट्रांसफर होने के बावजूद सचिव इंद्रपाल यादव पुनः ग्राम पंचायत घटाई में आकर जॉइनिंग (जोनिंग) कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में असंतोष और गहराता जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यह प्रक्रिया नियमों के विरुद्ध है और इसके पीछे अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

सीईओ व जिला दिशा को सौंपा ज्ञापन

इस पूरे मामले को लेकर ग्रामवासी एवं पंच मिलकर जनपद पंचायत के सीईओ एवं जिला दिशा समिति को लिखित पत्र (ज्ञापन) सौंप चुके हैं, जिसमें सचिव की कार्यप्रणाली, मनमानी रवैये और नियमों की अनदेखी की शिकायत दर्ज कराई गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में किस प्रकार की कार्रवाई करता है।

पूर्व ग्राम पंचायत जमथान में भी लगे थे गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सचिव इंद्रपाल यादव पूर्व में ग्राम पंचायत जमथान में पदस्थ थीं, जहां उनके कार्यकाल के दौरान खुलकर बिल लगाकर शासकीय राशि के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। जमथान से ट्रांसफर के बाद वे घटाई पंचायत में सचिव पद पर कार्यरत रहीं, लेकिन यहां भी उनकी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया।

संरक्षण के आरोप, कार्रवाई से बचने की चर्चा

ग्रामीणों का कहना है कि सचिव को कुछ शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों का संरक्षण प्राप्त है जिसके चलते उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। यही कारण है कि वे जहां भी पदस्थ होती हैं, वहां इसी प्रकार की कार्यप्रणाली देखने को मिलती है।

सरकारी नियमों की हो रही अनदेखी

नियमों के अनुसार जब किसी सचिव का स्थानांतरण होता है, तो नई पंचायत में पदभार ग्रहण से पूर्व प्रभारी सचिव के माध्यम से पंचायत की संपूर्ण जानकारी एवं दस्तावेज सौंपे जाते हैं, लेकिन घटाई पंचायत में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से किया जा रहा है।

ग्रामीणों की चेतावनी—न्याय नहीं मिला तो होगा उग्र आंदोलन

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार जहां एक ओर पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर ग्रामीणों की आवाज सुनने को कोई तैयार नहीं है। ग्रामवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सचिव के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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