जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति श्रीमती सुखमंती सिंह द्वारा धान खरीदी केंद्र का औचिक निरीक्षण
जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति श्रीमती सुखमंती सिंह द्वारा धान खरीदी केंद्र का औचिक निरीक्षण
(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)
करहारी धान खरीदी केंद्र में भारी अनियमितता उजागर, जिला पंचायत सदस्य सुखमंती सिंह का औचक निरीक्षण — किसानों के साथ तौल में गड़बड़ी का आरोप
छत्तीसगढ़ राज्य के जिला एमसीबी अंतर्गत केलहारी विकासखंड स्थित करहारी धान खरीदी केंद्र में धान खरीदी के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है। किसानों की लगातार शिकायतों के बाद जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति श्रीमती सुखमंती सिंह द्वारा आज धान खरीदी केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान मौके पर कई गंभीर खामियां देखने को मिलीं, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
निरीक्षण के समय यह पाया गया कि शासन द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार जहां एक बोरी धान का वजन 40 किलोग्राम (अधिकतम 41 किलोग्राम) होना चाहिए, वहीं कई बोरियों का वजन इससे कहीं अधिक पाया गया। इससे स्पष्ट होता है कि धान तौल में मनमानी की जा रही है और किसानों के साथ खुला अन्याय किया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि जानबूझकर अधिक वजन की बोरियां भरवाई जा रही हैं, जिससे उनकी वास्तविक उपज का पूरा मूल्य उन्हें नहीं मिल पा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सदस्य सुखमंती सिंह स्वयं मौके पर पहुंचीं और पूरे धान खरीदी प्रक्रिया का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दूरभाष के माध्यम से केलहारी एसडीएम से संपर्क कर उन्हें तत्काल मौके पर आने को कहा। हालांकि एसडीएम स्वयं मौके पर उपस्थित नहीं हो सकीं, लेकिन उन्होंने अपने प्रतिनिधि के रूप में श्री राम प्रताप को निरीक्षण स्थल पर भेजा।
एसडीएम प्रतिनिधि की मौजूदगी में पुनः कई बोरियों का वजन कराया गया, जिसमें किसानों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए। वजन में अनियमितता सामने आने के बाद पूरे धान खरीदी केंद्र में हड़कंप मच गया। इस दौरान मौजूद किसानों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय किसानों का कहना है कि धान खरीदी केंद्रों पर इस तरह की गड़बड़ियां कोई नई बात नहीं हैं, बल्कि हर साल किसानों को इसी तरह परेशान किया जाता है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी कर्मचारियों, ठेकेदारों एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसानों के साथ इस तरह का शोषण न हो।
किसानों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन एवं संबंधित विभाग इस गंभीर प्रकरण में क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा




