मनरेगा को लेकर भ्रम फैलाने की साजिश बेनकाब, ‘विकसित भारत: जी राम जी योजना’ से मजदूरों को 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी
मध्य प्रदेश

मनरेगा को लेकर भ्रम फैलाने की साजिश बेनकाब, ‘विकसित भारत: जी राम जी योजना’ से मजदूरों को 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी
(पढिए राजधानी एक्सप्रेस न्यूज़ हलचल आज की सच्ची खबरें)
केन्द्रीय सरकार शिवराज सिंह चौहान ने मनरेगा को लेकर एक बार फिर देशभर में भ्रम फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं। जनता और मजदूरों को गुमराह करने के लिए तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि विकसित भारत: जी राम जी योजना’ मनरेगा से आगे बढ़ते हुए ग्रामीण रोजगार और विकास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।
योजना के तहत मजदूर भाइयों को अब 100 दिन नहीं, बल्कि 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। यदि किसी कारणवश समय पर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ता देने के प्रावधान को और अधिक सशक्त बनाया गया है। साथ ही, यदि मजदूरी भुगतान में देरी होती है, तो मजदूरों को अतिरिक्त राशि (मुआवजा) देने का भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
सरकार ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चालू वर्ष में ₹1,51,282 करोड़ से अधिक की ऐतिहासिक राशि प्रस्तावित की है, ताकि रोजगार उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की वित्तीय कमी न हो। इस राशि का उपयोग न केवल मजदूरों को काम देने के लिए किया जाएगा, बल्कि इसके माध्यम से गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जाएगा।

योजना के अंतर्गत विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए विकसित, स्वावलंबी, गरीबी-मुक्त और रोजगार-युक्त गांवों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के कार्य, आजीविका मूलक गतिविधियां तथा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
125 दिन के रोजगार की गारंटी के साथ यह भी सुनिश्चित किया गया है कि कृषि कार्य के दौरान छोटे और सीमांत किसान भाई-बहनों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो। योजना को इस प्रकार तैयार किया गया है कि खेती और मजदूरी के बीच संतुलन बना रहे।
इस कानून में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। प्रशासनिक व्यय की सीमा 6% से बढ़ाकर 9% कर दी गई है। यदि प्रस्तावित कुल राशि ₹1,51,282 करोड़ का 9% निकाला जाए, तो यह लगभग ₹13,000 करोड़ के बराबर होता है। इस राशि से पंचायत सचिव, रोजगार सहायक एवं तकनीकी स्टाफ सहित योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने वाले कर्मचारियों को समय पर और पर्याप्त वेतन मिल सकेगा, जिससे वे पूरी क्षमता और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर सकें।
विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह कानून गरीबों के हक में, विकास के पक्ष में और मजदूरों को रोजगार की पूर्ण गारंटी देने वाला है। यह योजना विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित गांवों के संकल्प को मजबूत आधार प्रदान करती है।
अंत में अपील की गई है कि सच को जनता तक पहुंचाया जाए, ताकि भ्रम और अफवाहों के बजाय वास्तविक तथ्यों के आधार पर देश का ग्रामीण समाज आगे बढ़ सके।




