*बाबू महाराज के मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, आस्था के आगे हारीं पाबंदिया*
जिला धौलपुर राजस्थान

बाबू महाराज के मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, आस्था के आगे हारीं पाबंदिया
बाबू महाराज के मेले में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, आस्था के आगे ढीलीं पड़ी पाबंदिया।
बाड़ी ( धर्मेन्द्र बिधौलिया )8 सितम्बर
पूर्वी राजस्थान के लोक देवता बाबू महाराज के मेले में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हालांकि राज्य सरकार एवं प्रशासन ने पिछले 2 साल से कोरोना लॉकडाउन के चलते मेले के आयोजनों पर रोक लगा रखी थी और इस वर्ष भी प्रशासन के द्वारा मेले के आयोजन पर रोक लगाई गयी थी।

इसके लिए मंदिर के आने वाले मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी लेकिन आस्था के आगे जहां एक और श्रद्धालुओं ने अन्य मार्गों को चुना वहीं प्रशासन को भी झुकना पड़ा और मेले में श्रद्धालुओं के आने पर रोक हटाई गई जिसके चलते बाबू महाराज के मेले में लाखों श्रद्धालु पहुँचे।

धौलपुर जिले के जिले के बाड़ी उपखंड के बसई डांग थाना क्षेत्र में बाबू महाराज का मंदिर स्थित है। जिसके बारे में मान्यता है के यहां पर कुष्ठ रोग के रोगी पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं जिसके चलते यहां राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश ,हरियाणा दिल्ली आदि आज कई राज्यों से श्रद्धालु अपनी मनौती लेकर आते हैं और जब उनकी मनौती पूर्ण हो जाती है तो वे यहां मंदिर में और मंदिर के बाहर घंटा चढ़ाते हैं ।

मंदिर के बारे में एक विशेष बात यह है कि यहां पर चंबल के बीहड़ों के कुख्यात दस्यु भी पुलिस को चकमा देकर घंटा चढ़ा जाते हैं।
इस बार भी कोरोना गाइडलाइंस के अंतर्गत मेले के आयोजनों पर राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन ने प्रतिबंध लगाया है। लेकिन आस्था के आगे प्रशासन की पाबंदियां ढीली पड़ गई। बाबू महाराज मंदिर के पुजारी गादीपालभगत ने बताया कि मंदिर में देश के कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष अपने मनौती लेकर आते हैं और मनौती पूर्ण होने पर यहां पर घंटा भी चढ़ाते हैं।
बसई डाँग थाने के थाना प्रभारी मंगतू राम चौधरी ने बताया प्रशासन ने कोरोना के नियमों के अंतर्गत ढील दी है।
हम यहां मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को एकत्रित नहीं होने दे रहे हैं और दर्शन के बाद उनको मंदिर से बाहर निकाल देते हैं।
इस मौके पर बाबू महाराज मंदिर के पुजारी गादीपाल भगत,रामभगत, देवी सिंह भगत, मंदिर कमेटी के विष्णु गुर्जर बरपुरा ,वीरेंद्र पटवारी, पीतम, भगवान सिंह मास्टर, रामदयाल पटवारी ,कप्तान आदि उपस्थित थे।




