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*अद्भुत: बेल के पेड़ में दिख रहे 21 पत्ते का वृक्ष 100 वर्षों से स्थित है सोन नदी तट पर शिवजी प्रतिमा और बेल का वृक्ष*

अनुपपुर जिला मध्यप्रदेश

अद्भुत: बेल के पेड़ में दिख रहे 21 पत्ते का वृक्ष

100 वर्षों से स्थित है सोन नदी तट पर शिवजी प्रतिमा और बेल का वृक्ष

प्रकृति का मनोहर दृश्य – काल सर्प चक्र होता है दूर

संभागीय ब्यूरो चीफ चंद्रभान सिंह राठौर की रिपोर्ट

अनूपपुर / मनुष्य को धरती पर जीवन के लालन पालन के लिए पर्यावरण  प्रकृति का उपहार है। वह प्रत्येक तत्व जिसका उपयोग हम जीवित रहने के लिए करते हैं वह सभी पर्यावरण के अन्तर्गत आते हैं जैसे- हवा, पानी प्रकाश, भूमि, पेड़, जंगल और अन्य प्राकृतिक तत्व हमारा पर्यावरण धरती पर स्वस्थ जीवन को अस्तित्व में रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। और प्राकृतिक अपना परिचय हमेशा बनाए रखने के लिए उसका प्रमाण भी देता है। जिले के कोयलांचल क्षेत्र से लगा हुआ ग्राम पंचायत चोलना के अंतर्गत प्राकृतिक धरोहर के बीच सोन नदी तट पर शिव जी का मंदिर प्रांगण विगत सौ वर्षों से आस्था का केंद्र बना हुआ है।


अद्भुत: है बेल के पेड़ – ज्यादातर लोग बेल के पेड़ से 3 पत्ते तोड़कर ही भगवान पर चढ़ाया जाता है परंतु  ग्राम पंचायत चोलना पर सोन नदी तट पर स्थित शिव जी मंदिर प्रांगण पर अद्भुत बेल का वृक्ष है।

मंदिर प्रांगण के पुजारी अजय मिश्रा ने बताया कि इस मंदिर प्रांगण पर स्थित बेल का वृक्ष अद्भुत है। हमारे पूर्वज अक्सर यहां आया करते थे और बताते थे कि यह बेल का वृक्ष  अद्भुत है। ज्यादातर लोग 3 पत्तों का ही वृक्ष देखे होंगे परंतु इस नदी तट शिव मंदिर के प्रांगण पर स्थित बेल के वृक्ष पर 5,7,8,11,13,15 से लेकर 21 पत्ते देखने को मिलता है। जो एक दुर्लभ है मेरा मानना है कि ऐसा वृक्ष कहीं नहीं होगा।

दो नदियों का संगम यह है विशेष –
शिव जी मंदिर प्रांगण के कुछ दूर पर ही सोन नदी व केवई नदी संगम है स्थानीय लोगों ने बताया कि संगम होने के कारण यहां पर पिंड दान अस्थि विसर्जन भी किया जाता है। मकर संक्रांति के दिन इस तट पर भव्य मेला का आयोजन भी होता है साथी प्राकृतिक धरोहर के बीच आस पास  लोग परिवार सहित पिकनिक बनाने के लिए भी पहुँचते है।

काल सर्प चक्र होता है दूर –

जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं तो ज्योतिष शास्त्र इस योग को काल सर्प दोष का नाम दिया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को शुभ फल देने वाला नहीं माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में यह दोष लग जाता है उसे सफलता बहुत देरी से मिलती है। परन्तु सोन नदी तट पर स्थित शिव मंदिर प्रांगण पर सोन नदी के जल से विशेष पूजा करने पर जल्द ही कालसर्प चक्र का दोष दूर हो जाता है।

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