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मुनिश्री पदम सागर जी महाराज ने कहा व्यवहारिकता की सच्ची शिक्षा केवल पाठशालाओं से मिलती है

कटनी जिला मध्य प्रदेश

मुनिश्री पदम सागर जी महाराज ने कहा व्यवहारिकता की सच्ची शिक्षा केवल पाठशालाओं से मिलती है

(पढिए जिला कटनी ब्यूरो चीफ ज्योति तिवारी की खास खबर)

कटनी।
मुनिश्री पदम सागर जी महाराज का गत दिवस बंगला जैन मंदिर, कटनी से बिहार के लिए विहार संपन्न हुआ। इस अवसर पर बंगला जैन मंदिर परिवार, बाहुबली कॉलोनी सहित जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। विहार से पूर्व मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहा और श्रद्धालुओं ने भावभीनी विदाई दी।

विहार से पूर्व मुनिश्री पदम सागर जी महाराज ने सागर पाठशाला से आए बच्चों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि “स्कूली शिक्षा मनुष्य को जीवन का निर्वाह करना सिखाती है, लेकिन धार्मिक एवं संस्कारात्मक शिक्षा जीवन के साथ-साथ जीवन का निर्माण भी करती है।” उन्होंने कहा कि पुस्तकीय ज्ञान आवश्यक है, परंतु उससे भी अधिक आवश्यक
व्यवहारिकता की शिक्षा है, जो केवल पाठशालाओं के माध्यम से ही प्राप्त हो सकती है।

मुनिश्री ने अभिभावकों से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से पाठशाला भेजें, जिससे वे यह सीख सकें कि कैसे बैठना चाहिए, कैसे उठना चाहिए, कैसे भोजन करना चाहिए और बड़ों से किस प्रकार आदरपूर्वक संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल में किताबी ज्ञान मिल रहा है, लेकिन संस्कार, शिष्टाचार और व्यवहारिकता की शिक्षा पाठशालाएं ही देती हैं, जो जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।

अपने कटनी चातुर्मास को स्मरण करते हुए मुनिश्री पदम सागर जी महाराज ने कहा कि “हमने अपने संत जीवन में अनेक चातुर्मास किए, लेकिन कटनी नगर में किया गया चातुर्मास विशेष और अविस्मरणीय रहा।” उन्होंने बंगला जैन मंदिर की भव्यता की सराहना करते हुए कहा कि यह मंदिर स्व. हुकुमचंद जी द्वारा निर्मित कराया गया था, जो आज भव्य और दिव्य स्वरूप में समाज की आस्था का केंद्र बन चुका है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसी परिवार के दामाद द्वारा सिंगापुर में संत निवास हेतु भूमि एवं भवन निर्माण की व्यवस्था की जा रही है, जो जैन समाज के लिए गर्व की बात है।

इस अवसर पर मंदिर प्रवचन में बंगला जैन मंदिर अध्यक्ष विजय जैन, राकेश जैन कक्का, सुधीश ‘पप्पू’ जैन, पंचम जैन, विमल जैन, राजकुमार जैन, रज्जन जैन, पवन जैन, आराधना जैन पूर्वी जैन, रोशनी जैन, आभा जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

साथ ही सागर से पधारे भक्तगण कल्पना शास्त्री, अभिलाष जैन, सुनीता वाधवानी, नेहा जैन, शिखा जैन, कविता जैन, विमल जैन, बसंत जैन एवं सागर पाठशाला से आए बच्चों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के अंत में समाजजनों ने मुनिश्री के मंगल विहार की कामना करते हुए उनके श्रीचरणों में नमन किया।

सादर प्रकाशनार्थ
राकेश जैन कक्का

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