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जनकपुर, मडीसरई, सिगरौली, कंजिया, कुवांरपुर और बहरासी धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण

जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

जनकपुर, मडीसरई, सिगरौली, कंजिया, कुवांरपुर और बहरासी धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

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जनकपुर, मडीसरई, सिगरौली, कंजिया, कुवांरपुर और बहरासी धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण

किसानों ने एग्री स्टॉक-गिरदावली और वजन में अनियमितताओं की शिकायतें दर्ज कराईं

छत्तीसगढ़ राज्य जिला एमसीबी भरतपुर विकासखंड अंतर्गत जनकपुर, मडीसरई, सिगरौली, कंजिया, कुवांरपुर और बहरासी धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों व किसानों ने अपनी समस्याएँ खुलकर सामने रखीं।

किसानों ने कहा—एग्री स्टॉक और गिरदावली से बढ़ रही परेशानी
ग्रामवासियों ने बताया कि एग्री स्टॉक व गिरदावली संबंधी कई तकनीकी और प्रक्रियागत समस्याओं के कारण किसानों को धान बेचने में लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि—
– तहसील कार्यालय से लेकर धान खरीदी केंद्र तक अनेक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
– दस्तावेजों और स्टॉक डेटा में त्रुटियों के कारण समय की बर्बादी हो रही है।
– कई बार छोटी-छोटी गड़बड़ियों को ठीक कराने में भी सप्ताहों लग जाते हैं।

किसान बोले—सरकारी दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा फर्क
किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा “डबल इंजन सरकार” के नाम पर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति पूरी तरह विपरीत दिखाई देती है।
किसानों ने कहा—
“कागजों में सुगम व्यवस्था दिखाई देती है, लेकिन जमीन पर किसानों की समस्या जस की तस बनी हुई है।”

धान तौल में अनियमितता का आरोप—41 किलो तक लिया जा रहा वजन
निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर शिकायत धान तौल को लेकर सामने आई।
किसानों ने बताया कि—
– सरकारी मानक के अनुसार प्रति बोरी 40.700 किलो धान लिया जाना चाहिए,
– लेकिन कई केंद्रों में कर्मचारियों द्वारा 41 किलो तक वजन लिया जा रहा है।

किसानों ने इसे सीधी-सीधी अनियमितता बताते हुए कहा कि अतिरिक्त वजन लेने से उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान होता है। किसानों ने यह भी कहा कि इस पर तत्काल कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है।

किसानों ने समाधान और पारदर्शिता की माँग की
ग्रामीणों ने यह मांग उठाई कि—
– खरीदी केंद्रों में तकनीकी सुविधा बढ़ाई जाए,
– हर केंद्र में स्पष्ट वजन-मानक बोर्ड लगाया जाए,
– अनियमितताओं में शामिल कर्मचारियों पर कार्रवाई हो,
– और खरीदी प्रक्रिया को सरल व पारदर्शी बनाया जाए।

निरीक्षण ने उजागर की अनेक व्यवस्थागत खामियाँ
इस निरीक्षण ने यह साफ कर दिया कि खरीदी केंद्रों में कई व्यवस्थागत खामियाँ मौजूद हैं, जिन्हें दुरुस्त किए बिना किसानों की परेशानी कम नहीं होगी।

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस बार उनकी शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करेगा।

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