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गोधौरा शासकीय स्कूल में अधूरा टॉयलेट निर्माण बना शर्मसार करने वाला उदाहरण, लाखों रुपये खर्च के बावजूद नहीं मिल पा रहा बच्चों को लाभ

तहसील भरतपुर जिला मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़

गोधौरा शासकीय स्कूल में अधूरा टॉयलेट निर्माण बना शर्मसार करने वाला उदाहरण, लाखों रुपये खर्च के बावजूद नहीं मिल पा रहा बच्चों को लाभ

(पढिए जिला एमसीबी ब्यूरो चीफ मनमोहन सांधे की खास खबर)

छत्तीसगढ़ राज्य के जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) अंतर्गत भरतपुर विकासखंड के ग्राम गोधौरा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में टॉयलेट निर्माण के नाम पर शासन के लाखों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन हालात आज भी बदतर हैं। ग्राम पंचायत के माध्यम से कराए गए इस निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

विद्यालय में टॉयलेट निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है जिसके चलते कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे शासन की मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। नन्हें विद्यार्थियों को शौचालय जैसी आवश्यक सुविधा न मिल पाना गंभीर लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का प्रतीक है।

ग्रामवासियों ने इस मुद्दे को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है और मांग की है कि इस पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से शासन के पैसे का दुरुपयोग किया है। शासन की योजनाओं का लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है, जबकि अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि अपनी जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से किए गए अधिकांश कार्यों में भी भ्रष्टाचार हुआ है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की चुप्पी ग्रामीणों के मन में आक्रोश बढ़ा रही है।

विद्यालय परिसर में अधूरा टॉयलेट निर्माण केवल एक उदाहरण है, जबकि गांव में कई अन्य ऐसे कार्य हैं, जिनमें भारी गड़बड़ी और बजट की लूट के आरोप सामने आ रहे हैं। यह स्थिति बच्चों, महिलाओं और आमजन के स्वास्थ्य एवं गरिमा के लिए खतरनाक है।

ग्रामवासियों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव एवं संबंधित अधिकारियों की जांच कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि आगे से कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति शासन की योजनाओं से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।

जनता की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए, बल्कि शासन को चाहिए कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे।

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