*बिजुरी मास्टरमाइंड सोंधिया,आंखों में मिर्च लगा दे रहा अपने काम को अंजाम निरंकुश हुई नगर सत्ता, जिम्मेदारों के साये में ही पल रहा भ्रष्टाचार का जिन*
अनुपपूर जिला मध्य प्रदेश

बिजुरी मास्टरमाइंड सोंधिया,आंखों में मिर्च लगा दे रहा अपने काम को अंजाम निरंकुश हुई नगर सत्ता, जिम्मेदारों के साये में ही पल रहा भ्रष्टाचार का जिन
रिपोर्टर :- संभागीय ब्यूरो चीफ
अनूपपुर/बिजुरी
सरकार द्वारा देश में जीएसटी लागू होने के पश्चात जीएसटी रजिस्ट्रेशन फर्म द्वारा ही निकाय को सप्लाई एवं सर्विस देने का अधिकार दिया गया है वही बिना जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लाखों रुपए का भुगतान रिंक कंप्यूटर के पक्ष में किया जाना नियम के विरुद्ध है जो भ्रष्टाचार को स्पष्ट दर्शाता
है फर्जी दस्तावेज के आधार पर रिंक कंप्यूटर बिजुरी द्वारा लाखों रुपए का गबन किया गया नगरपालिका बिजुरी में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद में पदस्थ दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी विनोद सोंधिया अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी बबीता सोंधिया के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर फर्म को लाभ पहुंचाने का कार्य करता आ रहा जिससे जीएसटी पैड लोगों को काफी नुकसान हो रहा वहीं दैनिक वेतनभोगी होने के बावजूद आखिर ऐसी कौन सी जादू की छड़ी विनोद को मिली जिनसे वह दिन प्रतिदिन धन्ना सेठ बनते जा रहे हैं।
माया के सामने सब का मोह विनोद के रहा फर्जी तरीके से शासकीय पैसे गोल
निकाय द्वारा किसी भी वस्तु के क्रय हेतु या 1 लाख से कम के बजट का कार्य कराने हेतु भाव पत्र आमंत्रण सूचना जारी कर टेबल टेंडर बुलाती है जिसमें क्षेत्र के आसपास के सप्लायर अथवा ठेकेदार अपना भाव पत्र बंद लिफाफे में तय समय सीमा में निकाय में उपलब्ध कराते हैं इसके पश्चात लिफाफे खोलकर विड मूल्यांकन समिति के द्वारा मूल्यांकन के पात्र व्यक्ति को कार्य सौंपा जाता है
इस प्रक्रिया में सम्मिलित सप्लाईकर्ता अथवा ठेकेदार जीएसटी या पीडब्ल्यूडी से रजिस्टर्ड होता है एवं सामान्य छोटे दुकानदार भी होते हैं वहीं इस पूरी प्रक्रिया के उलट स्वयं से भाव पत्र को षड्यंत्र कर इनके द्वारा तैयार कर लिया जाता है जो की पूर्णता फर्जी है सूत्रों से पता चलता है कि जिन कार्यों में रिंक कंप्यूटर को पात्र मानकर भुगतान किया गया है उन समस्त कार्यों में ज्यादातर भाव पत्र फर्जी है क्योंकि ऐसी कोई दुकान या इस नाम की कोई फर्म बताए गए पते पर संचालित ही नहीं है इस फर्म द्वारा इतना ही नहीं या तो सप्लाई ही नहीं होती या कम मात्रा में होती है वहीं कई कार्यों में तो बिना मैटेरियल सप्लाई के ही भुगतान उक्त फर्म को किया जा चुका है।
विनोद के लैपटॉप में छुपे कई राज धीरे धीरे हो रहा मालामाल
नपा बिजुरी में पदस्थ कम्प्यूटर ऑपरेटर विनोद सोंधिया महज एक दैनिक वेतन भोगी ऑपरेटर के पद पर पदस्थ हैं लेकिन जिम्मेदारों की कृपादृष्टि से नपा के खजाने की चाबी उसी के हाथों सौंप दी गई है नपा में महज ऑपरेटर की हैसियत रखने वाले सोधियों के द्वारा नपा के यूजर आईडी का पूरा दुरूपयोग किया जाता है
साथ ही वे अपने निजी लैपटॉप में पूरे नपा की जानकारी समेट कर मनमाने तरीके से अपने चहेतों को भुगतान व जेम पोर्टल के माध्यम से जेम पोर्टल में सप्लायर्स का डेटा भी अपलोड करने का कार्य उसी के द्वारा किया जाता है और मन चाहे व्यक्ति या फर्म को एल वन बनाकर सीधे लाभ पहुंचाया जाता है ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि विनोद का लैपटॉप किसी भ्रष्टाचारी बारूद से कम नहीं है।
तो आखिर.! सोंधिया को किसका मिल रहा अभयदान
प्राप्त जानकारी के अनुसार कंप्यूटर ऑपरेटर विनोद सोंधिया अपने निजी फर्म के नाम पर लाखों के भुगतान के साथ अन्य फर्मों के माध्यम से नपा के खजाने में सेंधमारी की जा रही है
महज दैनिक वेतन भोगी के पद पर पदस्थ सोंधिया के द्वारा निजी व चहेतों के फर्मों को लाखों का भुगतान करने समेत कर्मचारियों के भविष्य निधि पर भी डाका डालने समेत कई ऐसे कार्य हैं जो नपा बिजुरी में चल रहे हैं ऐसा नहीं है इस पूरे मामले की जानकारी नपा के जिम्मेदारों को नहीं है वहीं जन चर्चा है कि नपा के इन्हीं जिम्मेदारों द्वारा हो रहे इस भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के बजाये सोधिया को खुली छूट देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है।
क्या.! वाकई जिम्मेदार हैं अनजान
सूत्रों की मानें तो नगरपालिका के मठाधीश बने कुछ जिम्मेदारों की कृपा केवल उनके चहेते कहे जाने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी विनोद सोंधिया पर बरस रही है
नपा के खजाने में सेंधमारी व निजी फर्मों को मनमाने भुगतान के साथ कर्मचारियों के भविष्य निधि के इस गोलमाल के पूरे खेल में इनकी मौन स्वीकृति है वहीं नगर की जनता के द्वारा नगरपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आये दिन ज्ञापन एवं शिकायत के माध्यम से उक्त मामले में विरोध दर्ज कराने का कार्य भी किया जा रहा है जो यह साबित करता है कि इन मठाधीशों की कार्यशैली न ही बिजुरी नगर की जनता के लिए जवाबदेह है और ना ही निकाय के शेष कर्मचारियों के लिए।




